मौदहा कस्बे में आराम फरमाते अन्ना मवेशी।
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कई साल से मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए इस बार अन्ना मवेशी बड़ी समस्या बने हुए हैं। खेतों में लहरा रही फसल बचाने के लिए किसान खेतों में भी ठिठुर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी अन्ना मवेशियों से फसल सुरक्षित नहीं है। कस्बे के पूर्वी तरौस रेलवे लाइन के निकट करीब डेढ़ सौ बीघे में खड़ी फसल अन्ना मवेशी चट कर गए। यही स्थिति गांव-गांव की है। लेकिन किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है।
मौदहा मौजे के अरतरा हार में किसान लईक अहमद अन्ना मवेशियोें से मसूर और गेहूं की फसल नहीं बचा सके। किसान रस्सन बाबा की 40 बीघे में चना व मसूर की फसल, अब्दुल खालिक की 40 बीघे की मटर, मसूर व अलसी की, सुखनंदन बाबू की छह बीघे फसल मवेशी चट कर गए। यही हाल लगभग सभी गांवों का है। फसल बचाने क ो ज्यादातर किसानों ने कटीले और ब्लेड वाले तार लगा रखे हैं। इनसे अन्ना मवेशी घायल भी होते हैं।
इसके बावजूद मवेशी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। अन्ना मवेशी दिन में तो कस्बे के अंदर आकर आराम करते हैं और जैसे ही रात होती है, ये खेतों का रुख कर लेते हैं। पूरी रात किसान इनकी रखवाली करता है। लेकिन इसके बावजूद खेतों की हरियाली मवेशी रात भर में चटकर रहे हैं। लगातार प्रदर्शन व आंदोलन करने के बाद भी प्रशासन चुप्पी साधे है।
फसल उजड़ने पर कर रहा पलेवा
कस्बे के पूर्वी तरौस मोहल्ला के कृषक किसान यूनियन के नेता इफ्तिखार अहमद व अन्य किसानों ने खेतों पर पहुंचकर अन्ना जानवरों से चट फसलों को दिखाते हुए बताया कि लगातार रखवाली के बाद भी वह तीन बीघा लाही की फसल नहीं बचा सका। खेत में बची फसल को किसानों ने दिखाते हुए कहा कि फिर से खेतों में पलेवा कर रहे हैं। इसके लिए फिर उन्हें खाद बीज का इंतजाम करना पड़ेगा।
फिर से करनी पड़ेगी मेहनत
कृषक रियाज पूर्वी तरौस ने बताया कि उसने16 बीघे में मटर, दस बीघे में गेहूं और इतने में ही अन्य फसलें बोई थीं। जिन्हें अन्ना जानवर खा गए। फिर नई फसल बोने के लिए वह खाद, बीज का इंतजाम तो करेगा ही साथ ही फसल बोने में फिर से मेहनत करनी होगी। इसके बाद भी कोई गारंटी नहीं है कि उनकी फसल बच सके। बताया कि उसी के निकट बच्ची व कामता की छह बीघे की फसल को मवेशी खा गए हैं।