फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hamirpur News: फर्जी बिल बाउचर से 400 रुपया का तसला, 450 की खरीदी झाड़ू

Mon, 01 Dec 2025 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
विज्ञापन
फोटो 30 एचएएमपी 20- खरीदी गई सामग्री का बिल वाउचर। स्रोत- पोर्टल
विज्ञापन
मौदहा (हमीरपुर)। सरकारी धन को कैसे ठिकाने लगाना है, यह कोई इचौली ग्राम पंचायत से सीखे। सामुदायिक शौचालय के लिए एक साल पूर्व खरीदी गई सामग्री के दाम खुले बाजार से दोगुना-तीन गुना तक बढ़ाकर लगाए गए हैं। 150-200 रुपये कीमत का मिलने वाला तसला 400 रुपया तो 100-150 रुपये वाली झाड़ू 450 रुपया में खरीदी गई है। खास बात यह है कि बिल वाउचर भी फर्जी है।
विज्ञापन


तहसील क्षेत्र के इचौली ग्राम पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय के लिए 27 नवंबर 2024 को नगर की खुशी ट्रेडर्स फर्म से कुल 18 सामग्री 20,660 रुपये की क्रय की गई थीं। इनमें छह झाड़ू 2,700 रुपये, चार तसला 1,600 रुपये, 20 लीटर फिनायल 1,400 रुपये, दो बोरी चूना 2,000 रुपये, दो डस्टबिन 1,000 रुपये, एक डिब्बा 500 रुपये, चार मग 160 रुपये, चार तौलिया 600 रुपये, 10 लीटर तेजाब 800 रुपये, एक कूड़ा गाड़ी 7,000 रुपये सहित अन्य सामान साबुन, फावड़ा आदि की खरीदारी की गई है। ये रेट खुले बाजार की तुलना में दोगुना-तीन गुना अधिक तक बढ़ा चढ़ाकर बिल में लगाए गए हैं।

शासन की पारदर्शिता व्यवस्था के तहत पंचायतों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर बिल वाउचर अनिवार्य रूप से अपलोड करने होते हैं। इन्हीं अपलोड रिकॉर्ड की जांच में कई मदों में बाजार मूल्य से अधिक रेट दिखाकर भुगतान किए जाने के बिंदु उभर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि जिस फर्म का बिल वाउचर लगा है। उस फर्म ने साल 2021 में ही जीएसटी सरेंडर कर दी थी, जबकि एक साल पूर्व कटे इसी फर्म के बिल पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी जोड़ी गई है। (संवाद)
विज्ञापन



सफाई व्यवस्था नदारद, पाथे जा रहे ऊपले
ग्रामीण मोनू बाजपेयी ने बताया कि पंचायत के अपलोड बिलों में एक झाड़ू का रेट 450 रुपये दर्ज है, जबकि बाजार में 20 से 100 रुपये तक का अच्छी क्वालिटी की उपलब्ध है। सफाई से संबंधित खर्च बिल में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, जबकि गांव में सफाई व्यवस्था धरातल पर कहीं नजर नहीं आती। शौचालय के सामने ऊपले पाथे जा रहे हैं।


घूर सफाई में खर्च हो गए 40 हजार रुपये

ग्रामीणों का कहना है कि कई मदों में सामग्री खरीद बाजार मूल्य की तुलना में अधिक रेट पर दिखाई गई है। कुछ सामान गांव में दिखते ही नहीं है। इससे अपलोड बिल वाउचरों की विश्वसनीयता पर संदेह बना है। घूर सफाई के लिए 40 हजार रुपये का बिल अपलोड किया गया है। आरोप है कि इसी मद में प्रधान के बेटे के नाम पर 21 हजार रुपये की निकासी दिखाई जा रही है।




उनके कार्यकाल में सभी खरीद बाजार रेट पर ही की गई हैं। प्रधान के बेटे के नाम किसी भी तरह का भुगतान नहीं हुआ है। उनके पहले की खरीद-फरोख्त के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
- नीरज कुमार, सचिव

-
तीन साल पूर्व सरेंडर कर दी थी जीएसटी

उक्त फर्म के मालिक अनिल गुप्ता कहते हैं कि उन्होंने ऐसा कोई बिल नहीं काटा है। साल 2021 में ही उन्होंने जीएसटी सरेंडर कर दी थी। किसी ने पुराने लेटर पैड पर बिल बना दिया होगा। इस मामले में उन्हें जानकारी नहीं है।
-



पोर्टल पर अपलोड बिल वाउचरों की जांच कराई जा रही है। जांच में यदि रेट बाजार मूल्य से मेल नहीं खाते या बिल असंगत पाए जाते हैं, तो संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


- राघवेंद्र सिंह, बीडीओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें