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मस्ती की पाठशाला : बच्चे खेलकूद में मस्त, मास्टरजी लड़ा रहे गप

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बिवांर। दावों से इतर सरकारी शिक्षा व्यवस्था धरातल पर औंधे मुंह गिरी है। हाल यह है कि जर्जर घोषित हो चुके स्कूल के बच्चों दूसरे स्कूल में शिफ्ट तो कर दिया गया लेकिन न तो भवन गिराया गया न नया बनाया गया। अब एक ही भवन में दो स्कूलों की कक्षाएं संचालित होने से पढ़ाई-लिखाई भी बाधित होती है। वहीं विद्यालय में मौजूद शिक्षिकाएं घरेलू बातें करने में व्यस्त दिखीं तो बच्चे खेलने में।
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दोपहर लगभग 12 बजे संवाद न्यूज टीम छानी बुजुर्ग गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंची। यहां बच्चे बरगद के पेड़ के नीचे बैठे बातें कर रहे थे तो कुछ खेल रहे थे। वहीं शिक्षिकाएं घरेलू बातों में व्यस्त दिखीं। पूछने पर न तो उन्होंने अपने नाम बताए और न ही प्रधानाचार्य का नाम बताया। मौजूदा में कितना छात्रांकन है वह भी नहीं बता सकीं।
टीम ने बच्चों की बरगद के नीचे बैठे की फोटो खींची तो एक महिला अध्यापिका और एक शिक्षामित्र कहने लगे कि फोटो नहीं खींच सकते। वहीं, स्कूल के शौचालयों में ईंट पत्थर पड़े मिले। हाल यह है कि छानी बुजुर्ग गांव में 1830 में बना स्कूली भवन आज भी नहीं तोड़ा गया है। जबकि, बच्चों को उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां भी एक ही भवन में दो स्कूलों के बच्चे होने की वजह से बच्चों को मजबूरन खुले आसमान और पेड़ के नीचे बैठना पड़ रहा है।
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