भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। कसबे की तपोभूमि में चल रहे यज्ञ में कथावाचक पं.दुर्गा प्रसाद द्विवेदी ने लोगों को ज्ञान की गंगा में डुबकी लगवाई। वही यज्ञवेदी में श्री गायत्री मंत्र का जाप चल रहा है। तपोभूमि में भीड़ बढ़ने से मेले की रौनक बढ़ गई है।
ब्रह्म्लीन स्वामी रोटीराम महराज की तपोस्थली में यज्ञ की 57वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस मौके पर यज्ञवेदी पर 61 ब्राह्मणों द्वारा श्री गायत्री मंत्र का जाप किया जा रहा है। जिससे वेदी की रौनक बढ़ गई है। तपोभूमि आने वाले श्रद्धालु यज्ञ वेदी की परिक्रमा कर पुण्य हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा धन धान्य की पूर्ति के लिए मां अन्नपूर्णा का पाठ जारी है। कथा वाचक पं.दुर्गा प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि भागवत सुनने व सुनाने से पुण्य लाभ होता है। उन्होंने कहा कि संसार एवं शरीर नाशवान है। मानव जीवन भगवान के भजन के लिए मिला है। लेकिन मनुष्य मदों में चूर होकर भगवान को भूल जाता है। यज्ञ की पूर्ति दक्षिणा से होती है। चाहे जितना बड़ा यज्ञ कराओ लेकिन दक्षिणा नहीं दी तो यज्ञ पूर्ण नहीं होगा।
शिक्षा के प्रति सजग थे स्वामी जी
भरुआसुमेरपुर। स्वामी श्रीनागाजी रोटीराम महराज ऐसे संत थे कि उनकी एक झलक पाने और उनके अमृत वचन सुनने को लोग उमड़ पड़े थे। स्वामी जी तपोस्थली से तीन बार अज्ञातवास में गए। दो बार तो वह करीब दो वर्ष अज्ञातवास काटने के बाद आ गए। लेकिन तीसरी बार वह लंबे अंतराल के लिए कसबा छोड़ कर चले गए। जिससे कसबे के लोग बेचैन हो गए। करीब दस साल बाद लोगों को जानकारी हुई कि स्वामी जी रतलाम में है। तब कसबे के लोगों ने वहां पहुंच उनसे अनुनय विनय किया और भक्तों के सामने उन्हें अपनी जिद छोड़नी पड़ी। स्वामी जी जहां एक ओर लोगों को जीवन के मायने बताते वहीं नगर में शिक्षा के केंद्र न होने से यहां के नौनिहालों के भविष्य को विचलित हो गए। उन्होंने प्रथम यज्ञ में बची धनराशि से विद्यालयों की आधार शिला रखी। उन्होंने अपने जीवन काल में संस्कृत पाठशाला, श्री गायत्री विद्या मंदिर इंटर कालेज व श्री गायत्री बालिका इंटर कालेज की स्थापना कराई। इन विद्यालयों में नगर के नौनिहाल शिक्षा लेकर ऊंचे पदों पर है। स्वामी जी के ब्रह्म्लीन होने के बाद बालिकाओं की उच्चशिक्षा के बांदा रोड पर बालिका डिग्री कालेज की स्थापना हुई। जिससे हर साल 100 छात्राएं बीएड की डिग्री लेकर शिक्षण कार्य को बढ़ावा देने का संकल्प ले जा रही है।
यज्ञोपवीत संस्कार आज
भरुआसुमेरपुर। बीते वर्षों की भांति इस साल भी बटुक ब्राह्म्णों का यज्ञोपवीत संस्कार होगा। यज्ञ के ब्रह्म व संस्कृत पाठशाला के आचार्य पं.बल्देव प्रसाद शास्त्री ने बताया कि एक दिसंबर दिन सोमवार को यज्ञोपवीत संस्कार होगा। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि जिन ब्राह्मण बटुकों को यज्ञोपवीत कराना है वह लोग समय से तपोभूमि में उपस्थित हो जाए।