हमीरपुर। खरीफ की फसलों में सूखा पड़ने से किसान कराह रहे हैं। प्रशासन ने किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार से 24 करोड़ की डिमांड की है। इसमें बोया गया क्षेत्रफल 75.297 लाख हेक्टेयर प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग ने बोई गई फसलों में 109 करोड़ 72 लाख रुपये का नुकसान होना बताया है।
पिछले कई वर्षों से जनपद के किसान दैवी आपदा के प्रकोप का शिकार हो रहे है। बीते रबी सीजन में अतिवृष्टि से किसानों को अच्छा खासा नुकसान हुआ। गेहूं में 13, चना में 78, मटर में 67, मसूर में 69 फीसदी नुकसान होना पाया गया। इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन ने बीते मार्च माह में 52 करोड़ क ी डिमांड भेजी। लेकिन किसानों को अभी तक मात्र 2 करोड़ ही जारी हो सका है। इतनी कम धनराशि के आने पर राजस्व विभाग इसके वितरण करने से डर रहा है। इधर खरीफ की फसलों में प्राकृतिक आपदा किसान को झेलनी पड़ रही है। जिले का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 418870 हेक्टेयर है। इसमें 314470 हेक्टेयर पर खेती की जा रही है। खरीफ का क्षेत्रफल 93 हजार हेक्टेयर है। मानसूनी बारिश के छींटें बीते 7 अगस्त को पड़े थे। करीब एक महीने तक पानी नहीं बरसा। इसके चलते खेतों में खड़ी ज्वार 14.415 हेक्टेयर, अरहर 10032 हेक्टेयर, उड़द 7320 हेक्टेयर, मूंग 3662 हेक्टेयर धान 70 हेक्टेयर, बाजरा 208 हेक्टेयर व तिल 13163 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ है। तमाम किसानों ने सूखी फसलों की जुताई कर डाली है। वहीं कुछ किसानों ने खड़ी फसल पर मवेशी छुड़वा दिए। इस मामले में अपर जिलाधिकारी डीके पांडेय ने बताया कि 52 फीसद फसलें नष्ट होने की सूचना शासन को भेजी गई है। इसके लिए 24 करोड़ की डिमांड भेजी है।
प्रभावित ग्राम-629
कुल प्रभावित आबादी-9.37 लाख
खरीफ का प्रभावित क्षेत्रफल-75.297 लाख हेक्टेयर
प्रभावित अनुमानित लागत-109 करोड़ 72 लाख
लघु सीमांत किसान-66.58 प्रतिशत
सामान्य कृषक-34.42 प्रतिशत
30 फीसदी एरिया सिंचित
जिले का 30 फीसदी क्षेत्रफल पर सिंचाई के संसाधन है। कृषि योग्य जमीन 314470 हेक्टेयर है। इसमें 141447 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित है। देखा जा रहा है कि खरीफ में ज्यादातर फसलें असिंचित क्षेत्र में ही बोई जाती है। राजकीय नलकूपों की संख्या 536 है। लेकिन अभी तक अधिकांश नलकूप बंद पड़े है। वहीं नहरोें की लंबाई 832 किमी है। पक्के कुएं 2,884, उथले नलकूप 12,339 व गहरे नलकूप 15,204 है। जलसंसाधनों का विकास न होने से कृषि कार्य वर्षा पर आधारित है। नहरों को खरीफ के सीजन पर नहीं चलाया जाता। 80 फीसदी वर्षा 15 जून से 15 सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मानसून से होती है।
बरसात का भेजा गया ब्योरा
जून-28.64 एमएम
जुलाई-40.97 एमएम
अगस्त-32.80 एमएम
सितंबर में अभी तक-145 एमएम
मुआवजे की दरें निर्धारित
शासन द्वारा तय की गई किसान मुआवजे की दरों को नाकाफी मान रहे है। असिंचित क्षेत्रों में 4,5000 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्र में 9,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाना है। खास बात यह है कि अधिकतम दो हेक्टेयर तक की भूमि का मुआवजा मिलेगा।