सरीला (हमीरपुर)। कस्बे में कभी भी पेयजल का विकराल संकट खड़ा हो सकता है। 6 नलकूपों में 2 सालों से खराब पड़े हैं। वहीं दो नलकूप जवाब देने की कगार में पहुंच चुके हैं। सिर्फ दो नलकूपों से पूरे कस्बे की प्यास बुझाई जा रही है। पानी की दो टंकियों में से एक टंकी को इंजीनियर कंडम घोषित कर चुके हैं। लेकिन विभाग पूरी तरह बेफ्रिक है और उपभोक्ता पूरी तरह से त्रस्त हैं।
कस्बे की जलापूर्ति को यहां 6 पेयजल नलकूप व 2 टंकिया स्थापित की गई थीं। जिसमें महल के पास बनी बड़ी टंकी से तीन चौथाई कस्बे को जलापूर्ति होती है। वहीं बरहरा रोड पर कार्यालय परिसर में बनी टंकी को तीन तथा बरहरा रोड की टंकी को दो नलकूप भरते थे। एक नलकूप सीधे लाइन में चलाया जाता था। पिछले दो साल से पेयजल के हालात विकराल होते जा रहे हैं। ऊंचाई वाले इलाके झंडा बाजार में तो पूरे साल संकट रहता है। उसकी वजह विभागीय उदासीनता है। महल के पास बनी बड़ी टंकी को आईआईटी कानपुर के इंजीनियरों के पैनल ने तीन साल पहले ही कंडम घोषित करते हुए टंकी से जलापूर्ति न करने को भी कहा था। लेकिन विभाग ने इस संकट से निपटने के लिए कोई योजना तक नहीं बनाई गई है। 6 नलकूपों में से पुरानी टंकी परिसर व ब्लाक परिसर में लगा नलकूप दो ढाई साल से बंद पड़ा है। मनकहरी रोड पर लगे दो नलकूपों में से नलकूप संख्या 3 जवाब देने लगा है। इसी तरह बरहरा टंकी परिसर में लगा नलकूप संख्या 5 भी रुक-रुक कर पानी दे रहा है। सिर्फ मनकहरी रोड में लगे नलकूप संख्या 4 व खेड़ा रोड पर लगे नलकूप संख्या 6 पर ही पूरे कस्बे की जलापूर्ति का भार है जिससे 13 से 14 घंटे बिजली मिलने के बाद भी सुचारु आपूर्ति नहीं हो पा रही है। विभाग के जेई एनपी सिंह ने बताया कि दो नलकूप जल निगम को रिबोर के लिए पिछले साल दिए थे लेकिन अभी रिबोर नहीं हुए। जबकि दो नलकूपों में पानी कम है।