रंगस (हमीरपुर)। देश की सर्वोच्च अदालत के मुस्लिम धर्म के तीन तलाक पर आए फैसले से हमीरपुर में खुशी की लहर है। मुस्लिम महिलाओं ने कोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक और सम्मानजनक बताया है। उन्होंने अब केंद्र सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार निर्धारित छह माह की अवधि के भीतर कड़ा कानून बनाने की मांग की है। ताकि अन्य धर्मों की महिलाओं की तरह मुस्लिम महिलाएं भी समाज में सुरक्षित महसूस कर सकें।
मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि तीन तलाक का इस्लाम में कहीं कोई जिक्र नहीं है। इसके बावजूद कई मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के कारण पुरुषों के शोषण की शिकार हो रही थीं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम महिलाओं को काफी राहत मिली है। मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि इस फैसले को किसी धर्म विशेष से न जोड़ा जाए। चूंकि यह महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा का मामला है।
1.हमीरपुर निवासी जलिखा का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है, जिसका हम स्वागत करती हैं। कई महिलाएं बेवजह तीन तलाक प्रथा के कारण शोषण की शिकार हो रही थीं। कोर्ट को बड़े पहले इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए था।
2. हाशिम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को किसी धर्म से जोड़कर न देखा जाए। चूंकि किसी की मां, बेटी, बहन और सास समेत हर महिला की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
3.रजीना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। भविष्य में इसके बेहतर परिणाम नजर आएंगे।
4.ताज बीबी का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के हक में फैसला देकर बहुत बड़ी राहत पहुंचाई है। इस दिन को हमेशा के लिए याद रखा जाएगा।