मौदहा बांध में ढाई लाख पौधे रोपित कराने आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ग्रीन यूपी क्लीन यूपी मिशन को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। हाल ये है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जो पौधे लगवाए थे उनमें से अधिकांश सूख गए हैं। रविवार को अमर उजाला में छपी खबर ग्रीन यूपी क्लीन यूपी का नहीं कोई असर खबर छपने के बाद विधायक गयादीन अनुरागी ने मौदहा बांध का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारी पौधारोपण में मनमानी कर रहे हैं। सिंचाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी की जा रही है। करीब 40 फीसदी पौधे सूख कर ठूंठ बन गए हैं। राठ विधायक गयादीन अनुरागी ने मौदहा बांध में रोपित पौधों की स्थिति देखी तो वह दंग रह गए।
उन्होंने मौके पर मौजूद सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता एसके पांडेय से पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे सके। अभियंता ने कहा कि अभी तक 2 लाख 20 हजार पौधों का रोपण हो सका है। गौरतलब है कि ग्रीन यूपी क्लीन यूपी के मद्देनजर बीते 7 नवंबर को प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बांध क्षेत्र के 160 हेक्टेअर भूमि पर पौधारोपण कराया था। लेकिन सीएम के जाते ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ऊबड़ खाबड़ स्थानों पर बिना पानी दिए पौधे रोपित कर दिए। विधायक ने कहा कि सूखे पेड़ लगाए जा रहे हैं।
गडढों में खाद की जगह पर राख डाली जा रही है। कहा कि मुख्यमंत्री की इस योजना में 5 फीसदी भी क्रियान्वयन नजर नहीं आ रहा है। पॉलीथिन तक नहीं हटाई गई और पौधों को रोपित कर दिया। उनके साथ चित्रगुप्त इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डॉ सत्यनारायन सिंह परिहार, डॉ चन्द्रपाल कौशल आदि भी रहे। विधायक ने कहा कि वह सीएम से मिलकर पौधारोपण की स्थिति से अवगत कराएंगे और जांच की मांग करेंगे।
अनुपयुक्त प्रजातियां लगाईं, वन विभाग के अधिकारियों ने खडे़ किए हाथ
राठ (हमीरपुर)। मौदहा बांध क्षेत्र में सिंचाई विभाग द्वारा लगवाए जा रहे पौधों की दुर्दशा देखकर वन विभाग के अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी महोबा जेडी सिंह, मौदहा पंकज शुक्ला, सुमेरपुर एके चौधरी, हमीरपुर मुकेश भटनागर, पनवाड़ी हरीसिंह, संजय शर्मा राठ, प्रकाश चन्द्र अजनर, कमला प्रसाद चरखारी, जेपी श्रीवास्तव सरीला ने मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन झांसी और वन संरक्षक चित्रकूट धाम मंडल बांदा को पत्र भेजा है।
इसमें बताया कि उनके द्वारा सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को दी गई तकनीकी जानकारी का पालन पौधारोपण में नहीं किया गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस जमीन पर अन्य प्रजातियां लगा दीं। इससे पौधारोपण की सफलता संदिग्ध है। चितवन, कनक चंपा, चकरेसिया, बोतल ब्रुुश, कचनार आदि प्रजातियां इस भूमि के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ये कुछ दिनों के बाद सूख जाएंगी।