हमीरपुर। दीपावली के दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने को शौर्य और विजय के रूप में मनाया गया। इस दौरान मोर पंख लेकर मौनिया यमुना स्नान कर 36 घंटे का व्रत लेकर मौन चराने की परंपरा निभाते हैं। इसी कड़ी में धूमधाम से ढोल-नगाड़ों की थाप व लाठियों के साथ दिवारी नृत्य खेलते हुए गो पूजन किया गया। गाय व सुअर का खेल भी उत्सव में आकर्षण का केंद्र रहा।
मंगलवार सुबह शुरू हुई बारिश के बीच पत्योरा, पचखुरा, जलाला, देवगांव, सुरौली बुजुर्ग, कलौलीतीर, कीरतपुर, सहजना, बरदहा, पौथिया, ललपुरा, स्वासा, कुमहऊपुर, कलौलीजार आदि गांवों में मौनियों ने मोरपंख लिए मौन चराई और जमकर नृत्य किया। मौनियों ने देव स्थलों का भमण कर शाम को गो पूजन किया। बैठका धाम मंदिर सहित जगह-जगह गांवों में दिवारी नृत्य के साथ एक दूसरे पर लाठियां चटकाईं। वहीं, कुछ क्षेत्र में बुधवार को भी मौन चराई गई। इनमें टिकरौली, बड़ागांव, उजनेडी, शिकरी, नदेहरा सहित गांवों में गाय व सुअर का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद दिवारी नृत्य का आयोजन हुआ।
दीवारी नृत्य शौर्य, साहस और एकता का प्रतीक
मौदहा क्षेत्र के छिमौली गांव निवासी राजा यादव ने बताया कि दीवारी कलाकार हाथों में लाठियां, पैरों में घुंघरू और कमर में मोरपंख पहनकर अद्भुत करतब दिखाते हैं। जो युद्ध या मार्शल आर्ट जैसा लगता है। लाठियों को हवा में घुमाना और एक-दूसरे पर वार-पलटवार करना इसकी खास शैली है। यह नृत्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति, गौरव, शौर्य और आत्मरक्षा का प्रतीक है। लोगों की मान्यता है कि यह नृत्य गोवर्धन पूजा के उपलक्ष्य में मनाते हैं। बुधवार को टिकरी, फत्तेपुरवा, इचौली, क्योटरा, नायकपुरवा, कपसा, करहिया, कुनेहटा, छिरका, भवानी, रीवन आदि गांवों के मौनियों ने गो पूजन कर भ्रमण किया।
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गाय व सुअर की लड़ाई रही आकर्षण का केंद्र
गहरौली। विकासखंड मुस्करा के खड़ेही लोधन गांव में ग्रामीणों ने गाय व सुअर को लड़ाने की परंपरा को कायम रखा। ढोल- नगाड़े के साथ गांव के श्रीचंद्र राजपूत के यहां से सुअर को बांधने के लिए रस्सी लाते हैं। सुअर देने वाले व्यक्ति के घर जाकर उसे हल्दी से रंगे पीले चावल व रस्सी देकर उसे सुअर दिए जाने का निमंत्रण देते हैं। उसके एक घंटे बाद सुअर को लाकर रस्सी में बांधकर सैकड़ों लोग पूरे गांव गलियों से उसे घसीटते हुए मौन पूजा स्थल तक ले जाते हैं। इसके बाद गाय से खेल खिलाने का कार्यक्रम शुरू किया जाता है।
गांव के पूर्व प्रधान राजाराम तिवारी, गोविंद इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य बलराम सिंह राजपूत, आत्माराम सिंह राजपूत ने गाय के साथ सुअर पूजन की कथा सुनाई। गांव के सिद्ध गोपाल यादव, सुरेंद्र यादव, अवधपाल व अरविंद पाल आदि लोगों ने बताया कि करीब 24 गायों की सुअर से लड़ाई कराते हैं।
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद
फोटो 22 एचएएमपी 10- रमेड़ी अखाड़ा में गाय व सुअर की लड़ाई देखते लोग। संवाद