सूखे और मौसम की मार का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है। मातृत्व सप्ताह में 350 गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार पाई गईं हैं। इससे पुष्टाहार और गर्भवतियों के लिए चलाई जा रही तमाम सरकारी योजनाओं की पोल भी खुल गई है। चिह्नित की गईं महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी श्रेणी की हैं।
सूखे से फसलों और सब्जियों की पैदावार प्रभावित हुई है। इनमें कमी आने के साथ ही तासीर (प्रभाव) में भी अंतर आया है। शायद यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से कुपोषित गर्भवती महिलाओं की तादाद बढ़ी है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 27 जनवरी से तीन फरवरी तक मातृत्व सप्ताह मनाया। इस दौरान जिले में 7334 गर्भवती महिलाओं में से 6541 की जांच हुई।
उनका वजन, ब्लड प्रेशर, खून और पेट की जांच की गई। जांच के दौरान 350 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की चिह्नित की गईं हैं। वहीं जिले के बाहर गई 793 महिलाओं की जांच नहीं हो सकी है। इन महिलाओं का ब्लाक स्तरीय सीएचसी, पीएचसी, महिला अस्पताल में उपचार कराया जाएगा।
जनवरी और फरवरी में हुई जांच पर एक नजर
दिनांक लक्षित जांच हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाएं
27 998 930 41
28 1112 1060 43
29 1159 1018 72
30 1043 888 49
31 832 729 49
01 748 651 32
02 687 586 17
03 755 679 47
कुपोषित गर्भवती महिलाओं को पांच फरवरी को सभी सामुदायिक केंद्रों, पीएचसी व जिला अस्पताल में 102 नंबर एंबुलेंस से लाया जाएगा। महिलाओं को आयरन की गोली, सुक्रोज इंजेक्शन देकर उपचार किया जाएगा। रक्त की कमी होने पर जिला अस्पताल में ब्लड चढ़ाया जाएगा।
डा. आरएस सोनी, सीएमओ
मशीन की खराबी पर जताई नाराजगी
हमीरपुर। कुरारा विकासखंड के शीतलपुर एवं झलोखर गांव में बुधवार को मातृत्व दिवस का निरीक्षण करने पहुंचे सीडीओ उस समय दंग रह गए, जब केंद्र में उपलब्ध दो मशीनों से अलग-अलग तौल कराने पर गर्भवती महिला के वजन में पांच किग्रा का अंतर मिला।
सीडीओ ने एएनएम से अन्य महिलाओं के जांच के अभिलेख मांगे, तो वह कोई अभिलेख नहीं दिखा सकीं। हालांकि जांच के दौरान कोई महिला हाई रिस्क प्रेगनेंसी की नहीं मिली। सीडीओ एबी सिंह ने शीतलपुर के प्राथमिक स्कूल परिसर में एएनएम सीमा देवी, आशा ज्योति चौरसिया और आंगनबाड़ी कार्यकत्री संपत तिवारी की मौजूदगी में गर्भवती विमला पत्नी रामकरन की जांच कराई। यहां दो मशीनों में महिला के वजन में अंतर मिलने पर मशीन की खराबी पर नाराजगी जताई।