हमीरपुर। जिले में अन्ना गोवंशों के संरक्षण के लिए 331 गोशालाएं हैं। फिर भी अन्ना मवेशी सड़कों पर धूम रहे हैं। वाहनों से टकराने पर लोगों की जान जा रहीं है। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शासन से निर्देशों के बाद भी प्रशासन नियमों का पालन नहीं करा पा रहा है।
गोशालाओं में गोवंशों के भरण-पोषण के लिए प्रति मवेशी 50 रुपये रोजाना देने का प्रावधान है, लेकिन बुंदेलखंड में अन्ना मवेशियों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। जिले से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे-34 पर इन दिनों अन्ना मवेशियों ने कब्जा कर लिया है।
बीते दिनों डीएम घनश्याम मीना ने समीक्षा बैठक में कहा था कि सड़कों पर अन्ना मवेशी दिखने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। सरीला के धौहल बुजुर्ग, बंगरा, जलालपुर, राजामऊ और मुस्कुरा ब्लॉक के बांधुर खुर्द, बिवांर, निवादा, शायर गांवों में अन्ना मवेशी शाम ढलते ही सड़कों पर डेरा जमा लेते हैं। यह मवेशी राहगीरों और बाइक सवारों के लिए आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। लोडर चालक हसन खान ने बताया कि वह महोबा से गाड़ी लेकर कानपुर सब्जी लेने जा रहा था। तभी सड़क पर अचानक गोवंश आ गया। उसे बचाने के चक्कर में हादसा हो गया।
जिले भर में 38,591 मवेशी संरक्षित होने का दावा
पशुपालन विभाग का कहना है कि जिले की 330 ग्राम पंचायतों में संचालित 331 पशु आश्रय स्थलों में कुल 38,591 गोवंश संरक्षित हैं। इनके भरण-पोषण में हर साल करीब 36 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च होती है। इसके बावजूद यही मवेशी सड़कों और खेतों में विचरण करते देखे जा रहे हैं।
सभी बीडीओ को अन्ना गोवंश को संरक्षित कराए जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सड़कों पर जो गोवंश विचरण करते हैं, वे लोगों के पालतू मवेशी हैं। लोग इनका दूध निकालकर छोड़ देते हैं। अभियान चलाकर ऐसे मवेशियों को भी बंद कराया जाएगा।
— डॉ. उपेंद्र सिंह, जिला मुख्य पशुचिकित्साधिकारी