डार्कजोन घोषित हो चुके विकासखंड क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना एवं प्रधानमंत्री कृषि विकास योजनार्गंत 22 तालाब खोदे जा रहे हैं। यह तालाब एक हेक्टेयर रकबा क्षेत्रफल से अधिक के हैं। तालाबों की खुदाई में अनियमितता पाए जाने पर डीएम ने रोक लगा दी है। साथ ही तालाबों का सत्यापन के लिए तीन टीमें जांच को गठित की है।
विकासखंड क्षेत्र में 22 तालाबों की खुदाई 6.44 करोड़ की लागत से लघु सिंचाई विभाग करा रहा है। बिना सीमांकन एवं पैमाइश के ही आंकलन तैयार कर गड़बड़ झाला करने के आरोप हैं। इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर जिलाधिकारी उदयवीर सिंह यादव ने 30 दिसंबर को अधिशाषी अभियंता लघु सिंचाई को आदेश भेजकर
तत्काल कार्य बंद कराए जाने के लिए कहा। तालाबाें के सत्यापन के लिए तीन टीमें गठित की है। पहली टीम में सीडीओ के साथ अधिशाषी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व डीआरडीए के परियोजना निदेशक हैं। यह टीम टेढ़ा, पचखुरा बुजुर्ग, बड़ा कछार व देवगांव के तालाबों का सत्यापन करेगी। दूसरी टीम में डीसी मनरेगा महेंद्र देव के साथ उपकृषि
निदेशक व सहायक अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को शामिल करते हुए उजनेड़ी, छानी खुर्द, पौथियां व ललपुरा के तालाबों का सत्यापन करेंगे। जबकि तीसरी टीम उपायुक्त स्वत: रोजगार के साथ अधिशाषी अभियंता जलनिगम व सहायक अभियंता बीआरडीए को शामिल किया गया है। जो बांक, पलरा, मवईजार, मिहुंना व पारा रैपुरा के तालाबों की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
पांच बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
जिलाधिकारी ने इन टीमों से पांच बिंदुओं में रिपोर्ट मांगी है। जिसमें सक्षम स्तर से स्टीमेट स्वीकृत कराया गया है या नहीं। सीमांकन, पैमाइश हुई अथवा नहीं व पूर्व में बने पाटो की स्थिति का आंकलन किया गया है कि नहीं। सत्यापन कार्य की वीडियोग्राफी कराए जाने के आदेश दिए हैं। उधर मुख्य विकास अधिकारी ने शनिवार का संबंधित ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर तालाब खुदाई में हो रही गड़बड़ियों की लिखित जानकारी ली है।