राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत विकासखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 11 तालाबों का 1.92 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार किया जाएगा। लेकिन इन तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए छह माह का समय दिया गया है। जिससे इस बरसात का पानी इन तालाबों में संरक्षित नहीं हो सकेगा। जिससे लोगों को इस वर्ष कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।
मौजूदा समय में बुंदेलखंड सूखे व जल संकट से जूझ रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री का तालाबों पर विशेष फोकस है और अतिक्रमण व समाप्त हो चुके तालाबों को नए सिरे से जीर्णोद्धार के लिए बजट जारी कर रहे हैं। विकासखंड क्षेत्र के तालाबों को लघु सिंचाई विभाग द्वारा जीर्णोद्धार के लिए बजट जारी किया गया है।
जिस पर अधिशाषी अभियंता ने तालाबों की खुदाई के लिए निविदाएं निकालते हुए टेंडर आमंत्रित किए हैं। जिसमें बांक गांव के खेरापति तालाब को 18.19 लाख व बाड़ा तालाब को 13.21 लाख की लागत से जीर्णोद्धार किया जाना है।
इसी तरह पौथिया के प्रमोद तालाब के लिए 14.83 लाख, देवगांव के कामाख्या देवी तालाब को 32.27 लाख, मवईजार के कुंआखेड़ा तालाब को 24.13 लाख व पाथामाई तालाब को 14.38 लाख, पलरा के मोती तालाब को 11.09 लाख, ललपुरा के चरनदास तालाब को 22.80 लाख, टेढ़ा के नरहेबाबा तालाब को 15.16 लाख व मिहुंना के बासुनाथ बाबा तालाब को 10.77 लाख व पारा रैपुरा के गातेबाबा तालाब को 15.68 लाख रुपये की लागत से खुदाई कराकर जीर्णोद्धार किया जाना है।
इन तालाबों की खुदाई के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए है। जिसमें खुदाई का समय छह माह निर्धारित किया गया है। जिससे इस बरसात में इन तालाबों में पानी भर पाना मुश्किल होगा। अगर पानी भी भर गया तो खुदाई में खुला खेल होना तय है।