फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अभिशाप बने 1.25 लाख अन्ना मवेेशी

Sun, 11 Dec 2016 10:58 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
विज्ञापन
पौथिया गांव में फसल को चरते मवेशी। - फोटो : Amar ujala
विज्ञापन
 बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा पर रोक लगाने के तमाम प्रयास नाकाफी हैं। किसानों के लिए यह एक नई आपदा के रूप में सामने आई है। पशुपालन विभाग करीब तीन साल से अन्ना मवेशियों को रोकने का दावा कर रहा है। बुंदेलखंड विशेष पैकेज से चौपाल लगाकर इस कुप्रथा को रोकने का प्रयास हुआ।
विज्ञापन


इसमें 12 लाख रुपया खर्च हो गए। बीते वर्ष पड़े सूखे में लघु सीमांत किसानों को भूसा वितरण नाकाफी साबित हुआ। यही कारण है कि ज्यादातर किसानों ने मवेशियों को अन्ना कर दिया है। पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में 4,69,046 गाय, बैल व भैंस हैं। इनमें भैंसों की संख्या 1,99,533 है। जिन्हें ग्रामीणों ने बांध रखा है। शेष 269513 गाय व बैलों में लगभग आधे अन्ना कर दिए गए हैं। जो किसानों की नाक में दम किए हैं। अन्ना मवेशी किसानों की फसल चट कर रहे हैं। जिससे परेशान किसान अब मौत को भी गले लगाने लगे हैं।

इधर, पशुपालन विभाग अन्ना घूम रहे बछड़ों का बधियाकरण कर रहा है। ताकि अन्ना गायों में नस्ल सुधार कर जर्सी गाय तैयार हो सकें और आगे चलकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिले। बीते वर्षों में रबी फसल की बुआई होते ही पशुपालक मवेशियों को खूंटे से बांधते रहे हैं। लेकिन पिछले साल पड़े सूखे के बीच पशुपालकों ने भैंसों को तो खूंटे से बांधे रखा, लेकिन गाय व बैल और बछड़े अन्ना कर दिए।
विज्ञापन


जिलाधिकारी उदयवीर सिंह यादव जिले में गोशाला निर्माण की पहल पिछले कई महीनों से कर रहे हैं। इसके लिए कई गांवों में ग्राम समाज की जमीन तलाशी गई। चिंहित जमीनों पर प्रधानों से मनरेगा के जरिए बाउंड्री बनाने के निर्देश दिए गए। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।

अन्नाप्रथा (जानवरों को बिना बंधन के रखना) उन्मूलन के लिए एक दशक से अधिक समय से अभियान चलाए जा रहे हैं। विभिन्न ब्लाकों में स्थित पशु चिकित्सालयों पर अन्ना प्रथा रोकने के लिए पशुपालकों को ज्वार, मक्का नि:शुल्क दिया जाता है, ताकि वह पशुओं को हरा चारा खिला सकें, लेकिन शासन की इस सोच पर पशुपालक पलीता लगा रहे हैं।


मवेशियों को इकट्ठा करना हुआ घातक
बीते साल बरसात न होने से जमीन परती पड़ गई। तब रबी अभियान शुरू करने के लिए किसान खेतों में पलेवा करने लगे। इसी बीच ग्रामीणों ने मवेशियों को छुट्टा कर दिया। तब छोड़े गए पालतू मवेशी अपने गांव तक सीमित रहे। लेकिन जैसे ही नवीन गल्ला मंडियों में इन्हें बंद कर कुछ ही दिनों बाद छोड़ा गया, तो इनके झुंड के झुंड जिस खेत में घुसे, पूरी की पूरी फसल नष्ट कर दी। पौथिया के किसान रामजी कहते हैं कि उन लोगों को अन्ना मवेशी पिछले दो साल से तंग किए हैं। कहते हैं कि ट्रकों में भरकर ले जाए जा रहे मवेशियों को पुलिस ने उनके गांव में छुड़वा दिया। वहीं, गांव की मंडी में आसपास के गांवों से किसान हांक लाए।
विज्ञापन


यह हो रहा असर
पशुओं की प्रजाति प्रभावित हो रही है।
नस्ल खराब होने से दुग्ध उत्पादन की क्षमता घटी।
आवारा पशु दुर्घटना का कारण भी बन रहे हैं।
फसल चर जाने से किसान कर रहे आत्महत्या।
ठिठुरन के बीच फसल रखवाली में किसानों की जा रही जान।
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें