उत्तर प्रदेश में चल रहे ग्रीन इंडिया मिशन को केंद्र सरकार की आर्थिक मदद की दरकार है। केंद्र सरकार की बेरुखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तकरीबन 100 प्रस्तावों में से महज आगरा के एक प्रस्ताव को ही केंद्र ने हरी झंडी दी है।
केंद्र सरकार की लेटलतीफी के कारण प्रदेश में हरियाली बढ़ाने का प्रदेश सरकार का सपना फिलहाल साकार नहीं हो पा रहा है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने कम होती हरियाली को बढ़ाने के लिए ग्रीन इंडिया मिशन शुरू किया है। केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की निगरानी में चलाए जा रहे मिशन में उत्तर प्रदेश समेत 21 राज्य शामिल हैं।
इसके तहत केंद्र सरकार अगले दस सालों में हरियाली को बढ़ाने के लिए करीब 46 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसमें से प्रदेश को कितना हिस्सा मिलेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन केंद्र की बेरुखी जगजाहिर है।
हरियाली बढ़ाने के लिए सरकार मनरेगा समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं की मदद लेगी। हकीकत यह है कि मानकों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में हरियाली कम है। इसका सबसे बड़ा कारण उत्तराखंड का प्रदेश से अलग होना है।
प्रदेश सरकार को ग्रीन इंडिया मिशन शुरू होने से प्रदेश में हरियाली का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन केंद्र सरकार द्वारा धन मुहैया न कराने के कारण योजना धीमी गति से चल रही है।
अभी तक केंद्र ने सबसे ज्यादा धन झारखंड के लिए मंजूर किया है। यूपी की तुलना में झारखंड में जंगल ज्यादा हैं, यहां पर करीब 27 फीसदी क्षेत्रफल में जंगल हैं। पिछले साल प्रदेश सरकार ने केंद्र को इस मिशन के तहत करीब 100 प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन केंद्र ने महज प्रस्ताव आगरा के लिए मंजूर किया है।
प्रदेश में ग्रीन इंडिया मिशन का काम देख रहे मुख्य वन संरक्षक सीपी गोयल कहते हैं कि प्रदेश की तरफ से करीब 100 से ज्यादा प्रस्ताव भेजे गए थे लेकिन केंद्र ने महज आगरा के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों पर मंजूरी देनी है और हम इंतजार में हैं कि केंद्र इन योजनाओं को जल्द से जल्द मंजूरी दे ताकि प्रदेश के अन्य जगहों पर इसे लागू किया जा सके।