प्रदेश सरकार विवादित जमीन देकर एम्स की राह में बाधा खड़ी कर रही है। ऐसे में अगर कोई तकनीकी बाधा नहीं आई तो अंतिम विकल्प के रूप में फर्टिलाइजर कैंपस में एम्स के लिए दो सौ एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी। यह भूमि केंद्र सरकार की प्रापर्टी है। संभव है कि प्रधानमंत्री के जुलाई में होने वाले गोरखपुर दौरे के दौरान फर्टिलाइजर और एम्स दोनों का शिलान्यास किया जाए। शीघ्र ही स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम फर्टिलाइजर की जमीन का सर्वे करने गोरखपुर आएगी।
यह जानकारी सांसद आदित्यनाथ ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में एम्स को लेकर पीएमओ चिंतित है, मगर प्रदेश सरकार विवादित जमीन देकर एम्स की राह में बाधा खड़ी कर रही है। मुख्यमंत्री के बयान गुमराह करने वाले हैं। पीएमओ के प्रधान सचिव के साथ उनकी दो दिन पूर्व हुई बैठक में अंतिम विकल्प के रूप में फर्टिलाइजर कैंपस में एम्स के लिए दो सौ एकड़ जमीन आवंटित करने पर सहमति बनी है।
उन्होंने बताया कि फर्टिलाइजर का परिसर एक हजार एकड़ से अधिक है। नई तकनीक के आधार पर स्थापित होने वाले फर्टिलाइजर के लिए चार से पांच सौ एकड़ जमीन की जरूरत होगी। शेष में से दो सौ एकड़ भूमि एम्स के लिए आवंटित की जाएगी। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से प्रदेश सरकार जमीन को लेकर गुमराह करने वाला बयान दे रही है। उसने जिस जमीन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है वह विवादित है। केंद्र सरकार ने बाउंड्रीवाल के लिए हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका दिया है। उसके कर्मचारी प्रस्तावित भूमि पर जब काम करने पहुंचे तो प्रशासन ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि इस जमीन पर कोर्ट से स्टे है।
सांसद ने सवाल उठाया कि जब जमीन पर स्टे था तो प्रदेश सरकार ने कैसे प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेज दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार डेढ़ साल से भूमि की मांग कर रही है और प्रदेश सरकार अब तक उसे उपलब्ध नहीं करा सकी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो 21 या 22 जुलाई को प्रधानमंत्री गोरखपुर का दौरा करेंगे। उसी दौरान एम्स और फर्टिलाइजर का एक साथ शिलान्यास होगा।