दवा घोटाला से सुर्खियों में आए महिला अस्पताल में फिर घोटाला उजागर हो गया है। इस बार उपकरणों की खरीद में गोलमाल किया गया है। मामला शासन तक पहुंच चुका है और प्रमुख सचिव ने इस मामले में प्रभारी एसआईसी को दोषी मानते हुए जवाब मांगा है। प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने साफ कर दिया है कि यदि एक हफ्ते में जवाब नहीं आया तो दोषी मानते हुए मौजूद दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख सचिव ने पत्र में कहा है कि एसएनसीयू (न्यू सिक बार्न केयर यूनिट) उपकरणों की खरीद में आरसी टेंडर के लिए महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर से राजकीय चिकित्सालयों में अनुबंध दर के आधार पर क्रय किए जाने का आदेश दिया गया था। मगर यह संज्ञान में आया है कि जिला महिला अस्पताल के उपयोग के लिए एसएनसीयू उपकरणों का क्रय अनुबंधित दर के आधार पर करने के बजाय शार्ट टर्म टेंडर के माध्यम से किया गया है। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए क्रय नीति के खिलाफ और वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना है। शासन ने इस पूरे मामले में प्रभारी एसआईसी डॉ. नीना त्रिपाठी को दोषी माना है और एक सप्ताह में उनसे जवाब मांगा है।
बता दें कि डॉ. नीना त्रिपाठी के कार्यकाल का यह पहला मामला नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही कमिश्नर की जांच में दवा घोटाला सामने आ चुका है। जिसकी पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। कमिश्नर की जांच में आया था कि साल भर दवा के लिए बजट न होने की बात कहीं गई और उस मद में आए बजट को दूसरे मद में इस्तेमाल किया गया।