जिला महिला अस्पताल में मंगलवार को भी मरीज को रेफर करने करने पर हंगामा हो गया। आरोप है कि पहले खून के इंतजाम को कहा फिर ऑपरेशन से इंकार करते हुए रेफर कर दिया गया। इससे नाराज घरवालों ने सीएमओ और एसआईसी से शिकायत भी की। एसआईसी शिकायत के बाद खुद डॉक्टर के पास ले गए। डाक्टर के हीलाहवाली जवाब पर घरवाले नाराज होकर प्राइवेट अस्पताल लेकर चले गए।
सूरजकुंड के रहने वाले हरिशंकर चौबे की पत्नी अनुराधा चौबे को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में घरवालों ने भर्ती कराया था। मंगलवार को ऑपरेशन करने को कहा गया था। डॉ. रीता गौतम ने खून की कमी भी बताई थी, जिसका इंतजाम भी घरवालों ने कर लिया मगर सुबह अचानक मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यह सुनकर घरवालों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद वे सीएमओ के पास पहुंचे मगर वहां से कोई जवाब नहीं मिला तो वह सीधे एसआईसी के पास गए। एसआईसी ने जानकारी के बाद मरीज के साथ डॉक्टर के पास पहुंचे लेकिन डॉक्टर ने एनेस्थीसिया का हवाला देते हुए अपनी परेशानी बताई, इसके बाद परिजन गर्भवती महिला को निजी अस्पताल ले गए।
बेहोशी के डॉक्टर बने पहेली
जिला महिला अस्पताल में दो बेहोशी के डॉक्टर तैनात हैं। सोमवार को सीमा वर्मा हो या मंगलवार को अनुराधा दोनों के ही घरवालों का एक ही आरोप है कि मौजूद स्टाफ ने बेहोशी के डॉक्टर न होने की बात बताई। जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एनेस्थीसिया के डॉक्टर मौजूद थे। मरीज को रेफर क्यों किया जा रहा है, इसका जवाब उनके पास नहीं है।
मामले की जानकारी हुई तो डॉक्टर से पूछताछ की गई। महिला की स्थिति गंभीर थी जिस वजह से रेफर किया गया है। रही बात एनेस्थीसिया के डॉक्टर की तो इसकी जांच कराई जाएगी कि आखिर वह कहां थे।
- डॉ. एके गुप्ता, एसआईसी
स्ट्रेचर न मिलने पर हंगामा, नोकझोंक
मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में स्ट्रेचर न मिलने पर मंगलवार को हंगामा हो गया। बिहार के रामदरश तिवारी न्यूरो सर्जरी वार्ड नंबर दो में भर्ती हैं। सिर में चोट लगने के कारण डॉक्टर ने एक्सरे और सीटी स्कैन लिखा था। दोनों ही जांच के लिए मरीज को ले जाना था। वार्ड में स्ट्रेचर नहीं मिला तो तीमारदार विजय तिवारी ट्रॉमा सेंटर में खाली रखे स्ट्रेचर की मांग करने लगे मगर कर्मचारी ने देने से इंकार कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई। गार्ड ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। कर्मचारी की माने तो 23 स्ट्रेचर ट्रॉमा में है जिसमें से सात खराब हो चुके हैं। वार्डों के स्ट्रेचर का भी यही हाल है। कई बार शिकायत भी की गई है मगर स्ट्रेचर नहीं मिल रहा।