मंगलवार की सुबह और दोपहर में हुई बारिश ने शहर को नर्क में तब्दील कर दिया। उफनाए नालों का गंदा पानी सड़क और घरों में जा पहुंचा। इससे शहरवासियों को भारी दिक्कत हुई। तमाम जगह बाल्टी या फिर मग के सहारे घरों से पानी निकाला गया। कुछ घरों में मुहाने तक पानी भर गया, जिसे बाहर निकालने में भी परेशानी हुई। पानी घंटों जमा रहा। तमाम शहरवासियों ने कहा कि इतनी तो बारिश नहीं हुई जितना पानी लग गया। 40-45 मिनट की बारिश में शहर का यह हाल रहा तो मानसूनी बारिश में नाव लेकर चलना पड़ेगा।
नगर निगम इस महीने की शुुरुआत से शहर के नाला- नालियों की सफाई का दावा कर रहा है, लेकिन मंगलवार को हुई मात्र 23 मिलीमीटर की बारिश ने नगर निगम के दावों की हकीकत उजागर कर दी। चोक नालों की वजह से पानी का बहाव रेगुलेटर की तरफ नहीं हुआ, लिहाजा शहर के करीब-करीब सभी इलाकों में जलभराव हो गया। चौक चौराहों, गलियों, शहर के निचले इलाकों सहित कुछ जगह के घरों में भी जलभराव हुआ, जिस वजह से राहगीर, दो पहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानियां उठानी पड़ी। हर जगह पर लोग गंदे पानी से बचते-बचाते निकल रहे थे। विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के घर के सामने एक फीट से ज्यादा पानी भरा था। शास्त्री चौक से जिला अस्पताल रोड, बख्शी पुर, टाउन हाल, जिला पंचायत रोड, बेतियाहाता, कचहरी रोड, असुरन रोड, साहबगंज मार्केट, गीताप्रेस रोड, तारामंडल रोड स्थित विभिन्न कॉलोनियां, बुद्ध विहार, सिद्धार्थ कालोनी, ट्रांसपोर्ट नगर, धर्मशाला ओवरब्रिज के नीचे समेत शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव हुआ। कुछ इलाकों में तो पांच छह घंटे तक पानी भरा रहा। विजय सिनेमा के पास जबरदस्त जलभराव देखने को मिला।
इतनी बारिश तो नहीं हुई जितना पानी लग गया
मंगलवार को मात्र 23 मिलीमीटर बारिश हुई। मात्र इतनी बारिश से शहर का यह हाल रहा तो जब मानसून में बारिश होगी तो क्या होगा। सामान्य मानसून के दौरान करीब 100 से 120 मिलीमीटर बारिश होती है। खूनीपुर वार्ड के पार्षद संजीव सिंह सोनू ने कहा कि गनीमत थी कि मंगलवार को मात्र 40 से 45 मिनट ही बारिश हुई। साहबगंज मंडी की दुकानों में पानी घुसने की स्थिति बन गई थी। अगर आधे घंटे और बारिश हो जाती तो दुकानों में पानी घुस जाता।
मरीज एवं तीमारदारों को हुई परेशानी
बारिश की वजह से जिला अस्पताल के सामने काफी जलभराव हो गया। इससे अस्पताल पहुंचे मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। उन्हें नालों के गंदे पानी से गुजरने को मजबूर होना पड़ा।
आरटीओ : दफ्तर में लाइसेंस की परीक्षा प्रभावित
बारिश से आरटीओ दफ्तर में जलभराव हो गया। मेन गेट से दफ्तर तक सड़क पर पानी भरने से लोगों को काफी दिक्कतें हुई। लर्निंग लाइसेंस कक्ष में शेड से पानी चूने लगा तो आनन फानन में फाइलें हटाई गई। वहां तैनात लिपिक हर्षवर्धन सिंह खुद बाल्टी लेकर खड़े हो गए। उधर, कमरे के बाहर पानी भरने से लाइसेंस बनवाने के लिए परीक्षा देने आए लोग बारिश से बचने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। करीब एक घंटे तक लाइसेंस की परीक्षा प्रभावित रही।
कलेक्ट्रेट: फाइलें और कुर्सी लेकर बदलते रहे जगह
दोपहर में हुई झमाझम बारिश ने कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की भी मुश्किलें बढ़ा दीं। संयुक्त कार्यालय, भू-लेख और अभिलेखागार में छतों से पानी टपकने से कर्मचारी फाइलें और कुर्सी लेकर जगह बदलते रहे। डीएम और एसएसपी दफ्तर के बाहर कलेक्ट्रेट परिसर में करीब एक घंटे तक डेढ़ से दो फुट तक पानी लगा रहा। बता दें कि कलेक्ट्रेट की कई इमारतों की उम्र 100 साल से अधिक हो चुकी है। इसे निष्प्रयोज्य घोषित कर नई इमारत बनाने के लिए पिछले करीब चार सालों से शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
बुद्ध नगर के घरों में घुसा गंदा पानी
बुद्ध नगर, रुस्तमपुर वार्ड नंबर 40 में बारिश के पानी की निकासी न होने से क्षेत्र के एक दर्जन से घरों में गंदा पानी घुस गया। संदीप मिश्रा, राम लखन, प्रभहंस यादव, दयाराम मिश्रा निखिल और दिवाकर ने बताया कि गंदे पानी की निकासी नहीं है। आम दिनों में भी पानी सड़क पर फैला रहता है। बारिश से उनके सामने मुसीबतें कई गुना बढ़ जाती है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और नगर निगम को कई बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। मशीन लगाकर पानी निकाला गया। हालांकि कुछ जगहों पर तो चार से पांच घंटे तक पानी भरा रहा, लेकिन निगम की टीम लगातार नालों की सफाई कर कूड़ा-कचरा का साफ करती रही। शहर के सभी बड़े नालों की सफाई शुरू हो चुकी है। जल्द ही नालों की सफाई का काम पूरा हो जाएगा।
- डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, मुुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी
बक्शीपुर बिजली दफ्तर में बारिश से सांसत
बक्शीपुर बिजली दफ्तर में मंगलवार को बारिश से कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को सांसत झेलनी पड़ी। बारिश के दौरान दफ्तर की छत टपकने लगी तो कर्मचारी परेशान हो उठे। थोड़ी ही देर हुई बारिश से दफ्तर में जलभराव हो गया। कर्मचारियों ने बताया कि 1928 में बना यह दफ्तर अब जीर्ण-शीर्ण हो गया है। इससे बेहद दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। बारिश होने पर दफ्तर में लोग कुर्सियां छोड़ पानी से बचने की जगह ढूंढने लगते हैं। मंगलवार को मीटर खंड में रखे बिजली के मीटर भी भीग गए। कर्मचारियों ने कहा कि अगर शीघ्र नई जगह पर दफ्तर स्थानांतरित नहीं किया गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
आंधी-बारिश ने बिगाड़ी बिजली
आंधी-बारिश से मंगलवार को शहर की बिजली व्यवस्था गड़बड़ा गई। कहीं जंफर कटे तो कहीं फ्यूज उड़ गए। इससे शहर के कई मुहल्लों में उपभोक्ताओं को परेशानियां झेलनी पड़ीं। नार्मल उपकेंद्र समेत बेतियाहाता इलाके में आंधी-बारिश से पहले ही फॉल्ट के कारण बत्ती गुल हो गई थी। बेतियाहाता इलाके में सुबह पांच बजे बत्ती गुल हो गई। काफी देर बाद भी सप्लाई चालू नहीं हुई तो उपभोक्ता परेशान हो गए। बाद में पता चला कि फॉल्ट के कारण बिजली बाधित है। इसी तरह नार्मल उपकेंद्र की बत्ती भी पांच घंटे बाधित रही। यहां का सीटी-पीटी उड़ गया था। सात बजे शुरू हुई दिक्कत पांच घंटे बाद दुरुस्त हो सकी। मरम्मत के काम में बारिश ने रोड़े अटकाए। इसके चलते फॉल्ट की मरम्मत में पांच घंटे का वक्त लगा। रुस्तमपुर का आजादनगर फीडर सुबह नौ बजे से 12 बजे तक ब्रेकडाउन में रहा। मेडिकल कॉलेज उपकेंद्र की बत्ती भी सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक बाधित रही। शहर के अन्य इलाकों में भी बारिश की दौरान फॉल्ट आए थे। कहीं जंफर कट गए थे तो कहीं फ्यूज उड़ गया था।