जिले में बहने वाली राप्ती नदी की लहरें शुक्रवार सुबह ही लाल निशान लांघ गईं। बढ़त अब भी जारी है। राप्ती के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से कई गांवाें पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कई जगह निचले स्थानों में पानी भर गया है। वहीं, कई दिन से स्थिर चल रही घाघरा के जलस्तर में भी अब बढ़त शुरू हो गई है।
जिले में बहने वाली प्रमुख चार नदियों में से दो बढ़त पर हैं। उनका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नेपाल में लगातार बारिश के बाद भी राप्ती का जलस्तर गुरुवार तक खतरे के निशान से नीचे था। सुबह उसने लाल निशान को पार कर लिया। जबकि राप्ती की सहयोगी नदी रोहिन का जलस्तर गिरा है। यह नदी गुरुवार तक खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। इसी तरह से कुआनों का भी जलस्तर घट रहा है। यूं तो सिंचाई विभाग की तरफ से हर बंधे पर कटान निरोधक उपाय की तैयारी पहले से की गई है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता आरडी यादव ने बताया कि अभी किसी बंधे पर कोई खतरा नहीं है। संवेदनशील स्थानों पर कटान रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
बचाव के लिए 86 बाढ़ चौकी
आपदा विभाग की तरफ से हर तहसील में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। सदर में 14, कैंपियरगंज में 15, चौरी चौरा में 4, सहजनवां में 10, बांसगांव में 19, खजनी में 11 तथा गोला में 13 बाढ़ चौकियां आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से स्थापित की गई हैं। इस तरह से कुल 86 चौकियां स्थापित की गई हैं। इसी तरह से पूरे जिले में 89 राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। जबकि 113 राहत शिविर आपदा विभाग की तरफ से स्थापित हैं। बाढ़ चौकियां कार्य कर रहीं हैं। वहां से नदी का जलस्तर और रिसाव की सूचना कंट्रोल रूम को दी जाएगी। जैसी जरूरत होगी उसके अनुसार पुलिस, राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाएगी। राहत केंद्र और राहत शिविरों को चिह्नित कर लिया गया है। किस स्थान पर कितने लोगों को रहने की व्यवस्था होगी, वहां पर कौन कौन सी चीजों की व्यवस्था करनी होगी, यह सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।
नदियाें का जलस्तर
घाघरा - बरहज में 66.950 बढ़त पर है
राप्ती - बर्डघाट 75.125 यह भी बढ़त पर
रोहिन - त्रिमुहानी 83. 290 उतार पर
कुआनों -चंद्रदीपघाट 88.450 उतार पर
कमिश्नर ने जांची बाढ़ बचाव की तैयारियां
नवागत कमिश्नर अनिल कुमार ने शुक्रवार को चार्ज संभालने के बाद सर्किट हाउस में बैठक कर मंडल में बाढ़ बचाव की तैयारियाें की समीक्षा की। इस दौरान कहा कि बाढ़ बचाव कार्यों पर शासन की सीधी नजर है लिहाजा इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मंडल के सिंचाई विभाग और प्रशासनिक अफसर चौकन्ने रहें। बंधों की सतत निगरानी की जाए। किसी भी हाल में कोई बंधा टूटना नहीं चाहिए। कहा कि अफसर अपना सूचना तंत्र मजबूत करें और समय से त्वरित कार्यवाही करें।
कमिश्नर ने आगे निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत शिविर में आने पर बेहतर व्यवस्था दी जाए। बाढ़ के दौरान प्रत्येक जगहों पर पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री, दवाइयां, चारे आदि जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए। उन्होंने सिंचाई विभाग के अफसरों से मंडल से होकर गुजरने वाली सभी नदियाें के जलस्तर की जानकारी ली। कहा कि जिन जगहों पर कटान हो उस जगह पर निगरानी रखते हुए मरम्मत के जो भी उपाय तत्काल हो सके उसे कराया जाए। किसी भी हाल में बंधा टूटने न पाए। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी से प्रभावित गांव में हुए चिकित्सा कार्यों की भी जानकारी ली।
इस दौरान एडीएम फाइनेंस गोरखपुर डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी, एडीएम देवरिया राजकेश्वर, महराजगंज अपर निदेशक स्वास्थ्य, चारों जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पशु चिकित्सा अधिकारी समेत सिंचाई विभाग एवं बाढ़ खंड के कई अफसर मौजूद रहे।