मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की ओर से नर्स पर की गई छेड़छाड़ प्रकरण की जांच रिपोर्ट विशाखा समिति ने कॉलेज प्राचार्य को सौंप दी है। हालांकि, कॉलेज प्राचार्य के शासकीय कार्य से लखनऊ चले जाने के चलते जांच पत्र का लिफाफा नहीं खुल सका है। उधर आरोप लगाने वाली नर्स को कॉलेज प्रशासन ने एक अन्य मामले में अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर कार्यमुक्त कर दिया है। इसे प्रकरण से जोड़ कर देखा जा रहा है।
10 दिन पहले इंसेफेलाइटिस वार्ड की नर्स ने एक डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाकर गुलरिहा थाने में तहरीर दी थी। थानेदार की सलाह पर नर्स ने प्राचार्य से लिखित शिकायत कर दी। प्राचार्य प्रो. आरपी शर्मा ने प्रकरण की जांच विशाखा समिति को दे दी और जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर यौन शोषण पर लगाम लगाने के लिए बनी विशाखा समिति ने जांच के बाद प्राचार्य को रिपोर्ट सौंपी है।
उधर एक तरफ जांच की जा रही थी तो दूसरी तरफ आरोप लगाने वाली संविदा पर कार्यरत नर्स को कार्यमुक्त करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इसके पीछे तर्क पिछले दिनों एक अन्य प्रकरण में उसकी ओर से की जा रही अनुशासनहीनता का दिया जा रहा है लेकिन सूत्रों के मुताबिक कार्रवाई के पीछे छेड़खानी प्रकरण ही है।
उधर कॉलेज की नर्सों की यह नाराजगी है कि जांच कमेटी में किसी नर्स को शामिल नहीं किया गया। नाम न छापने की शर्त पर एक नर्स ने सवाल उठाया कि डॉक्टर के खिलाफ जब डॉक्टर ही जांच करेंगे तो फिर नर्सें न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती हैं?
विशाखा समिति ने जांच रिपोर्ट दे दी है। शासकीय कार्य से लखनऊ आ जाने के चलते रिपोर्ट को नहीं देख सका हूं। वापस लौटते ही रिपोर्ट का लिफाफा खोला जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ कार्यवाही तय है।
-प्रो. आरपी शर्मा, मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर