नगर निगम उपसभापति मनु जायसवाल अपने पिता की तरह ही तीन साल उपसभापति का ‘कार्यकाल’ निभाएंगे। दरअसल उपसभापति का कार्यकाल सितंबर में ही खत्म हो चुका है। चार महीना होने को है, लेकिन कार्यकारिणी का चुनाव नहीं हो पाया। आचार संहिता लागू हो जाने के बाद अब मार्च तक चुनाव संभव नहीं है। जब तक चुनाव होगा और विधानसभा का गठन होगा, उसके कुछ दिन बाद पार्षदों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में वर्तमान उपसभापति मनु जायसवाल अपने पिता की तरह एक साल अतिरिक्त उपसभापति पद का ‘लाभ’ उठा सकते हैं।
निवर्तमान नगर निगम उपसभापति मनु जायसवाल के पिता सुरेंद्र जायसवाल मेयर अंजू चौधरी के कार्यकाल में उपसभापति थे। उस समय के बोर्ड के अंतिम कार्यकाल में भी कुछ ऐसी परिस्थितियां बनी थीं। उपसभापति का कार्यकाल समाप्त होने के कुछ दिन बाद चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई और दो साल का कार्यकाल होने के बावजूद सुरेंद्र जायसवाल तीन साल तक उपसभापति बने रहे। कुछ ऐसा ही लाभ मनु जायसवाल को मिल रहा है। सितंबर में ही मनु जायसवाल के उपसभापति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। लेकिन किन्हीं कारणों से कार्यकारिणी और बोर्ड की बैठक में उपसभापति के चुनाव की परिस्थितियां नहीं बनीं।
चार महीने हो चुके हैं कार्यकाल समाप्त हुए, लेकिन चुनाव, चुनाव परिणाम, नए सरकार के गठन आदि को देखते हुए नगर निगम कार्यकारिणी के रिक्त पदों के चुनाव के अलावा बोर्ड का चुनाव संभव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में मनु जायसवाल के इस बोर्ड के भंग होने तक उपसभापति बने रहने की संभावना प्रबल है।