राष्ट्रीय बाल कांग्रेस में अपना माॅडल प्रस्तुत करतीं छात्राएं।
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क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र और आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी की ओर से आयोजित 27वें राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को 143 बाल विज्ञानियों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर वैज्ञानिक कौशल का परिचय दिया। प्लास्टिक की ईंटें, फाइबर, धागे के साथ चलते कूड़ेदान और सोलर ट्रैकर, एल्गी से पेपर निर्माण, मंदिरों से अपशिष्ट के प्रोजेक्ट ने निर्णायकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
देर शाम सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी के मेधावियों ने मनमोहक प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी। सम्मेलन के दूसरे दिन सुबह से ही 10 कक्षाओं में प्रदेश भर से जुटे बाल विज्ञानियों ने अपनी-अपनी रिसर्च को प्रस्तुत करना शुरू किया। महज छह मिनट के अंदर ही विद्यार्थियों ने अपने क्षेत्र में मौजूद समस्या के कारण समेत उसके हल पर प्रकाश डाला।
देवरिया के रहने वाले प्रकाश द्विवेदी ने स्मार्ट बाइक पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। उनका दावा है कि गाड़ी का स्टैंड उठाते ही वो अपने आप चालू हो जाएगी। देश के किसी भी कोने में कोई भी चोर अगर आपकी बाइक लेकर जा रहा है तो आप उसे मोबाइल से लाइव देखने के साथ ही बंद कर सकते हैं। बलिया के बाल वैज्ञानिक अंशु यादव ने डेंगू पर अपना शोध पत्र निर्णायक मंडल के सामने प्रस्तुत किया। वहीं मुस्कान ने गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होने वाली तमाम परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपना प्रोजेक्ट तैयार किया। कौशिकी रश्मि ने सेनेटरी पैड्स पर आधारित अपना प्रोजेक्ट निर्णायक मंडल के सामने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर आरपीएम स्कूल के डायरेक्टर अजय शाही, विज्ञान कांग्रेस के संयोजक सुरेश चंद्र शर्मा, क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय, अनिल कुमार त्रिपाठी, देवेंद्र शाह, राजेश दीक्षित, विवेक सुदर्शन, डॉ. बीके त्यागी, डॉ. दीपक शर्मा, संतोष कुमार चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
विज्ञान के चमत्कार देख दूर हुआ भ्रम
बलिया जिले से मासु श्री सेवा संस्थान द्वारा ‘विज्ञान के सरल प्रयोग, विज्ञान सबके लिए थीम’ पर आधारित कई तरह के प्रयोग के लिए विज्ञान संचालक आशुतोष कुमार सिंह तोमर द्वारा बाल वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया गया। प्रयागराज से आए विज्ञान संचालक प्रमोद कुमार मिश्रा द्वारा चमत्कारों की वैज्ञानिक व्याख्या के माध्यम से बच्चों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। जिसे देखकर बच्चों के अंदर से अंधविश्वास दूर हुआ।
आज होगा समापन
तीन दिवसीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का समापन शुक्रवार को आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी में होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डीएम के. विजयेंद्र पांडियन होंगे। इस दौरान प्रतिभागी बाल विज्ञानियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। साथ ही तीन दिनों तक चले विज्ञान कांग्रेस के दौरान सर्वश्रेष्ठ रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले 40 बाल विज्ञानियों का चयन किया जाएगा। चयनित विज्ञानी केरला में आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में यूपी की टीम से हिस्सा लेंगे।
गांव के लोगों को स्वच्छ पानी और हवा दिलाने का जुनून
मेरठ के किसान गर्ल्स इंटर कॉलेज कंकरखेड़ा की दसवीं की छात्रा माही ने गांव के लोगों को स्वच्छ पानी, हवा दिलाने का बीड़ा उठाया है। 5000 की आबादी वाले गांव में चमड़ा उद्योग (टेनरी) से निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था न होने से परेशान इस बच्ची ने वहां के डीएम को पत्र लिखकर इसे दूर करने की मांग की है। छात्रा ने बताया कि वो स्कूल में मिले प्रोजेक्ट के सिलसिले में कंकरखेड़ा गईं थीं। वहां उन्हें पानी और हवा के प्रदूषित होने की जानकारी मिली। माही का पत्र मिलने के बाद प्रशासन की टीम समस्या के निपटारे में जुटी है। विज्ञान कांग्रेस में होने के बाद भी माही को लगातार मेरठ से फोन आ रहे हैं। माही ने बताया कि पानी को सस्ते तरीके से साफ करने का प्रोजेक्ट उन्होंने तैयार किया है।
कचरे से तैयार की ईंट और धागा
नजीबाबाद के नजीबुद्दौला गर्ल्स इंटर कॉलेज की सदफ, साराह शाहीद ने प्लास्टिक के कचरे से ईंट, फाइबर, धागा को तैयार करने में सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में पहुंची इन छात्राओं ने निर्णायकों के सामने अपने प्रोजेक्ट को प्रस्तुत किया। छात्राओं ने बताया कि कचरा प्रबंधन में उनकी ये विधि बेहद कारगर साबित हो सकती है। इसमें बहुत ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। वहीं ये स्वरोजगार को भी बढ़ावा देती है। गाइड टीचर शकील जेहरा और आंचल चौहान ने बताया कि इससे कचरे के निस्तारण की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।