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हिंदी साहित्य के फलक पर चमके छह साहित्यकार

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हिंदी साहित्य के फलक पर चमके छह साहित्यकार
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की सूची में गोरखपुर के छह साहित्यकारों ने सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। शुक्रवार को जब वर्ष 2018 के पुरस्कारों की घोषणा हुई तो यहां के साहित्यकारों की मेधा चमक रही थी। तीन ऐसे साहित्यकार हैं जिन्हें संपूर्ण साहित्य कर्म का सम्मान मिला है तो वहीं तीन अन्य की कृतियां पुरस्कार के लिए चयनित हुई हैं।
शहरनामा से चर्चा में आए डॉ वेद प्रकाश पांडेय को मधुलिमये साहित्य सम्मान, साहित्यकार प्रो आद्या प्रसाद द्विवेदी साहित्य भूषण के लिए नामित किए गए हैं। रेलवे के पूर्व मुख्य परिचालन प्रबंधक और साहित्यकार रणविजय सिंह को पं श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान से नवाजा जाएगा। गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के डीन प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी की पुस्तक ‘राजनीति सिद्धांत के नवीन पक्ष’ को गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार के लिए नामित किया गया है जबकि रौशन ऐहतशाम की पुस्तक ‘अपनी ही रोशनी में रौशन’ और साहित्यकार अनीता अग्रवाल की पुस्तक ‘बारहमासा’ को विद्या निवास मिश्र सर्जना पुरस्कार के लिए चुना गया है।
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संपूर्ण सेवा का सम्मान है
साहित्य भूषण सम्मान मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। इस सम्मान से सृजन के प्रति समर्पण बढ़ेगा। मेरी पांच मौलिक और 12 संपादित कृतियां प्रकाशित हो चुकी है। पुरस्कार तो कई मिले पर संपूर्ण सेवा पर यह सम्मान गर्व की बात है। साहित्य साधना निरंतर चल रही है।
प्रो. आद्या प्रसाद द्विवेदी, साहित्यकार
पुरस्कार सृजन का जोश भरते हैं
जीवन में जब कोई प्रयास करते हैं और उसे सराहा जाने के साथ सम्मान मिलता है तो हौसला बढ़ता है। ‘बातन हाथी पाइए’ व्यंग्य संकलन मेरी पांच पुस्तकों में मुझे सर्वश्रेष्ठ लगती है। एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं लेकिन पं श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान उससे कहीं बड़ी है। यह सही है कि सृजन का जोश भरते हैं।
रणविजय सिंह, साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त सीओएम एनईआर
नई कृति के लिए हौसला बढ़ाएगा
मधुलिमये साहित्य सम्मान पूरे जीवन के साहित्य अवदान पर मिला है। मेरी आठ मौलिक और सात संपादित कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। शहरनामा ने मुझे बड़ी ख्याति दी। सफर में पांच नाम का यात्रा वृत्तांत प्रकाशन के लिए तैयार है। इस सम्मान से नई कृति के लिए हौसला बढ़ेगा।
डॉ वेद प्रकाश पांडेय, साहित्यकार
और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी
मैंने एक कोशिश की थी, जिसे पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। मेरे लिए गर्व की बात है। यह मेरे सृजन की सार्थकता है। इस पुरस्कार को अपनी लेखन विधा को समर्पित करता हूं। करीब 40 से ज्यादा लेख अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। यह पुरस्कार मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा देगी।
प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, डीन कला संकाय गोविवि
पहली ही आत्मकथा पुरस्कृत होने से रोमांचित
मेरी पहली आत्मकथा ‘अपनी ही रोशनी में रौशन’ को विष्णु प्रभाकर सर्जना पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इससे बेहतर उपलब्धि भला क्या हो सकती है। इसका श्रेय साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ल और अपने पति आइएच सिद्दीकी को देती हूं। जिनके प्रोत्साहन का नतीजा रहा कि बेहतरीन सृजन कर सकी।
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रोशन ऐहतशम, साहित्यकार
नई पीढ़ी को समर्पित है बारहमासा
मारवाड़ी संस्कृति की हिंदी में जानकारी देने वाली कृति बारहमासा को विद्यानिवास मिश्र सर्जना पुरस्कार के लिए चुना जाना मेरे लिए उत्साहित करने वाला है। इसे मैंने नई पीढ़ी के लिए लिखा है। इसके पहले तीन कविता संग्रह और एक निबंध प्रकाशित हो चुका है।
अनीता अग्रवाल, साहित्यकार
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