भाजपा का भले ही विकास के मुद्दे पर उपचुनाव लड़ने का घोषित एजेंडा हो लेकिन गोरक्ष पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संसदीय सीट का वारिस उपेंद्र शुक्ला को बनाकर पार्टी ने जहां पूर्वांचल की सियासत में बड़ा दखल रखने वाले ब्राह्मणों को साधने का रास्ता तैयार किया है, वहीं क्षेत्रीय अध्यक्ष को चुनाव में उतारकर संगठन को भी अहमियत दी है।
गोरखपुर सहित पूर्वांचल के हर जिले का राजनीतिक, जातीय समीकरण अलग है। जाति और धर्म से जुड़ी चुनावी धारा अक्सर असल स्थानीय मुद्दों पर भारी पड़ती रही है। किसी चुनाव में अगड़े-पिछड़े (सवर्ण बनाम दलित) की गणित नतीजों को प्रभावित करती है तो कभी कहीं ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय का गुणा-भाग। यही वजह है कि पीस पार्टी और निषाद पार्टी की साझे की सियासत से जुड़कर सपा ने प्रवीण निषाद को उम्मीदवार बनाया।
जाहिर है सपा की मंशा मुस्लिम-यादव के साथ-साथ निषाद मतों को लुभाने की है। यह बात अलग है कि कांग्रेस से डॉ. सुरहीता करीम के चुनाव मैदान में आने से सपा के इरादों को सहज ढंग से रफ्तार मिलनी मुश्किल है।
उम्मीदवारों के एलान में सबसे बाद में पत्ते खोलने वाली भाजपा ने क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी बनाकर संगठन को साधने के साथ-साथ ब्राह्मण मतों को अपनी ओर केंद्रित करने की राह तैयार की है। उन ब्राह्मण मतों को, जिनकी सियासी धारा पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के इर्दगिर्द सिमटी मानी जाती है। ऐसे में उपेंद्र शुक्ला पर भरोसा जताकर भाजपा ने स्थानीय स्तर पर ब्राह्मण राजनीति का एक और केंद्र की स्थापित करने की बुनियाद डाल दी है। साथ ही इस फैसले से मुख्यमंत्री योगी के ब्राह्मण विरोधी और क्षत्रिय समर्थक होने के सियासी दुष्प्रचार को विराम देने की कोशिश भी की गई है।
कुछ समय पहले शिवप्रताप शुक्ला को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भी भाजपा ने कुछ ऐसे ही संकेत दिए थे। कुल मिलाकर मिशन 2019 के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे इस उपचुनाव के जरिए भाजपा पारंपरिक वोटों के साथ इधर-उधर छिटके ब्राह्मणों को अपने पक्ष में करने की मुहिम आगे बढ़ाती नजर आ रही है।
दूरदर्शी सियासी फैसला
भाजपा ने इस फैसले से पूर्वांचल ही नहीं यूपी के ब्राह्मण वोटरों को साधने की कोशिश की है। इसका प्रभाव निर्वाचन क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। अगले साल (2019) होने वाले चुनाव के लिहाज से यह दूरदर्शी सियासी फैसला है।
- प्रो. श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी, राजनीतिशास्त्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय
बगावत कर उपेंद्र ने लड़ा था चुनाव
टिकट न मिलने से नाराज उपेंद्र शुक्ला ने बगावत करके कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था। भाजपा ने शीतल पांडेय को चुनाव मैदान में उतारा था। तब उपेंद्र की बगावत की वजह से ही यह सीट भाजपा हार गई थी। उपेंद्र को भी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह संगठन के काम में लग गए। फरवरी 2013 में भाजपा ने उन्हें गोरक्ष प्रांत का क्षेत्रीय अध्यक्ष बना दिया।
29 साल बाद गोरक्षपीठ से अलग प्रत्याशी
गोरखपुर सदर संसदीय सीट से 29 साल बाद गोरक्ष पीठाधीश्वर या फिर उनके उत्तराधिकारी चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह सीट 1989 से ही गोरक्षपीठ के पास है। पहले महंत अवेद्यनाथ ने चुनाव जीता था, फिर योगी आदित्यनाथ सांसद बन गए। वह 1998 से 2014 तक लगातार चुनाव जीतते रहे। हर बार जीत का अंतर बढ़ा। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी को सांसद पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद खाली सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। गोरक्ष पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही हैं। उनका कोई उत्तराधिकारी भी नहीं है। पहली बार गोरक्षपीठ से अलग किसी व्यक्ति को टिकट दिया गया है। इससे पहले भी गोरखपुर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ का दखल था। वर्ष 1967 का लोकसभा चुनाव भी महंत दिग्विजयनाथ ने जीता था। इसके बाद हुए चुनाव में महंत अवेद्यनाथ जीते थे।
उपेंद्र की संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पैठ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली गोरखपुर संसदीय सीट से भाजपा के प्रत्याशी बनाए गए उपेंद्र शुक्ला की संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पैठ है। गोरक्ष प्रांत का क्षेत्रीय अध्यक्ष होने के कारण समाज के हर तबके से जुड़ाव है। 1 जुलाई 1960 में जन्में उपेंद्र ने स्नातक तक की पढ़ाई की है। उपेंद्र शुक्ला को 2013 में गोरक्ष प्रांत का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए और इस प्रांत के 10 जिलों की 13 में से 12 संसदीय सीटें भाजपा ने जीत लीं। सिर्फ आजमगढ़ संसदीय सीट भाजपा के कब्जे से दूर रही। यहां से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने चुनाव जीता था। उपेंद्र ने संगठन को मजबूती दी और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को बड़ी सफलता मिली। गोरक्ष प्रांत में विधानसभा की 62 सीटें हैं। इनमें से 46 सीटें भाजपा के खाते में आईं। नगर निगम, नगर पालिका परिषद के चेयरमैन (सात सीटों पर जीत) और नगर पंचायत अध्यक्ष (16 सीटों पर जीत) के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। अब 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में भाजपा ने उपेंद्र को गोरखपुर संसदीय सीट का टिकट उपहार स्वरूप दिया है। यह भी संदेश दिया है कि पार्टी में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं की अहमियत है। गोरखपुर सदर सीट से गोरक्ष पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार चुनाव जीते और सांसद बनें। उनकी जीत का अंतर हर बार बढ़ता गया। यही वजह है कि गोरखपुर सदर लोकसभा क्षेत्र को भाजपा की परंपरागत सीट माना जाता है।
संगठन में मजबूत पैठ
उपेंद्र ने भाजपा की राजनीति 1980 से शुरू की। 1985 में भाजयुमो के जिलामंत्री और 1986 में जिलाध्यक्ष बन गए। ईमानदारी से काम करते रहे। इसी का नतीजा रहा कि 1989 में उन्हें भाजयुमो का प्रदेश मंत्री बनाया गया। 1993 में जिलामंत्री, फिर जिलाध्यक्ष बनाया गया। वह 1997 से 2002 तक भाजपा गोरखपुर के जिलाध्यक्ष रहे। 14 फरवरी 2013 को उन्हें गोरक्ष प्रांत का क्षेत्रीय अध्यक्ष बना दिया गया।
एक घंटे पांच मिनट की मुलाकात से बनी बात
13 फरवरी को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र शुक्ला को दो बार गोरखनाथ मंदिर बुलाया। पहली बार 30 मिनट और दूसरी बार 35 मिनट तक बातचीत की। तभी कयास लगाए जा रहे थे कि योगी अपनी संसदीय सीट का वारिस उपेंद्र शुक्ला को बना सकते हैं।
नामांकन में ताकत दिखाएगी भाजपा
भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ला मंगलवार को नामांकन कराएंगे। नामांकन जुलूस गोरखपुर क्लब से कलेक्ट्रेट तक जाएगा। इसके जरिए भाजपा अपनी ताकत का अहसास कराएगी। उपचुनाव प्रभारी अनूप गुप्ता ने बताया कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा भी नामांकन जुलूस में रहेंगे। यूपी सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, दारा सिंह चौहान, जयप्रकाश राजभर और स्वामी प्रसाद मौर्य भी भाजपा प्रत्याशी का नामांकन कराने आ रहे हैं।
भाजपा कार्यकर्ता उत्साहित : शिव कुमार
क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र शुक्ला को टिकट मिलने से भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता उत्साहित हैं। सबने मिलकर क्षेत्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिव कुमार पाठक और मीडिया प्रभारी डॉ. सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि भाजपा ने कार्यकर्ता को टिकट देकर बड़ा काम किया है। सभी पूरी ऊर्जा के साथ उपचुनाव में बड़ी जीत सुनिश्चित करेंगे। चिरंजीव चौरसिया, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव सहित तमाम नेताओं ने भी उपेंद्र शुक्ला को बधाई दी।