प्रदर्शनी में पेंटिंग देखने पहुंचे लोग।
- फोटो : Amar Ujala
बदलते दौर की रंगीन दुनिया में जीवन के कुछ रंग पीछे छूट जाते हैं और कुछ नए भर जाते हैं। जीवन के इन्हीं रंगों को अपने अंदाज में प्रस्तुत किया है क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी के कलाकारों ने, जिनकी रचनात्मकता के कायल शहरवासी हो रहे हैं। अमृता कला वीथिका में तीन दिवसीय प्रदर्शनी में चित्रकला और मूर्तिकारी के विविध आयाम नजर आ रहे हैं। इस प्रदर्शनी में शहर के लोगों को 46 कलाकारों के हुनर देखने का मौका मिला है। अधिकांश कलाकारों ने भारतीय संस्कृति को आधार बनाते हुए कलाकृतियां तैयार की हैं।
यूं तो प्रदर्शनी में अमूर्त कला, लोककला, ग्राफिक, स्कल्पचर, नेचर पेंटिंग, मार्डन आर्ट, कोलाज लोगों को भा रहे हैं। राज्य ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित प्रदर्शनी के दूसरे दिन भी कलाप्रेमियों का अमृता कला वीथिका में पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। युवा कलाकार तूबा इकबाल की ‘ख्वाहिशों की उड़ान’ जिंदगी में मनुष्य की अनंत इच्छाओं को दर्शा रही है तो ‘भूली बिसरी यादें’ बच्चों के ऊपर घरवालों की इच्छाओं के बोझ को दिखा रही है। वहीं संतोष श्रीवास्तव की ‘लव- जेहाद’ केरल में हिंदू लड़कियों के साथ हो रही अमानवीयता की झलक पेश कर रही है।
इनके अलावा डॉ. रेखा रानी शर्मा ने सृजन व शिव पार्वती के सृष्टि निर्माण पर आधारित अमिट छाप छोड़ी है। प्रदर्शनी देखने रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य भी पहुंचे और कलाकारों की सराहना की। इस दौरान प्रदर्शनी की संयोजक डॉ. ऊषा सिंह, प्रो. सतेंद्र सिंह आदि लोग मौजूद रहे।