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अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर शिकंजा कसा तो डॉक्टरों ने वापस लिए नाम, चौंकाने वाले थे खुलासे

Thu, 19 Dec 2019 10:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • - शहर में 34 डॉक्टरों के नाम पर पंजीकृत हैं 41 अल्ट्रासाउंड सेंटर
  • - इन सेंटरों पर कोई दूसरा करते मिला था सोनोग्राफी
  • - स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद कई डॉक्टर बैकफुट पर आए
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विस्तार
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अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने के लिए अपनी डिग्री लगाने वाले चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद बैकफुट पर आ गए हैं। ऐसे कई डॉक्टरों ने खुद को इन अल्ट्रासाउंड सेंटरों से अलग कर लिया है। कई डॉक्टर शहर से बाहर होने का बहाना बना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अब इन चिकित्सकों से स्पष्टीकरण लेने की तैयारी कर रहा है।
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अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग परीक्षण जैसी अवैध जांच न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहर में चल रहे पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की थी। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत यह सेंटर जिस चिकित्सक के नाम से सेंटर पंजीकृत हो वही मरीजों की सोनोग्राफी यानी अल्ट्रासाउंड कर सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के सर्वेक्षण में सामने आया था कि शहर के 41 अल्ट्रासाउंड सेंटर जिन चिकित्सकों के नाम पंजीकृत थे वे इनमें जांच नहीं करते। यानी इन चिकित्सकों की जगह गैर प्रशिक्षित लोग अल्ट्रासाउंड जांच करते पाए गए थे। यह 41 अल्ट्रासाउंड सेंटर 34 चिकित्सकों के नाम पंजीकृत थे। स्वास्थ्य विभाग ने इन चिकित्सकों को नोटिस जारी किया था। नोटिस मिलने पर आधा दर्जन से अधिक चिकित्सकों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं।
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इनमें से कई चिकित्सक निजी अस्पतालों से जुड़े थे। कई चिकित्सकों ने नोटिस का जवाब दिया कि वे शहर के बाहर हैं। कुछ चिकित्सकों ने अस्पतालों के पैनल से अपना नाम हटवाने की बात कही। कुछ निजी अस्पताल अब दूसरे चिकित्सकों के नाम अल्ट्रासाउंड सेंटर करवाने के प्रयास मेें भी जुट गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकृत चिकित्सक द्वारा ही सोनोग्राफी कराए जाने की सख्त शर्त रखी है।
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अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन नहीं हो, इसके लिए जरूरी है कि जिस चिकित्सक के नाम पंजीकरण हो वही सोनोग्राफी जांच करे। जिन चिकित्सकों ने अभी तक जवाब नहीं दिया है उनको स्पष्टीकरण का एक और मौका दिया गया है। इसके बाद पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. नीरज कुमार पांडेय, एसीएमओ, जिला अस्पताल गोरखपुर
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