उलेमाओं में बैठक में तीन तलाक पर जिरह की।
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मेडिकल कॉलेज के निकट स्थित ईदगाह के पास वीर अब्दुल हमीद स्मारक महाविद्यालय में रविवार को कई नामचीन उलेमा जुटे। मौका था तीन तलाक को लेकर जिरह का। उलेमा बोले, खुद इस्लाम तीन तलाक को जुर्म करार देता है। बैठक में इस्लाम को बुराइयों को रोकने वाला और मुल्क से मोहब्बत रखने वाला मजहब बताते हुए एक साथ तीन तलाक देने वाले को शरीयत की नजर से सबसे बड़ा मुजरिम बताया गया।
मौलाना मोअज्जम आबिद ने कहा कि इस्लाम में एक साथ तीन तलाक जुर्म है। एक साथ तीन तलाक देने वाला इंसान इस्लाम की नजर में बहुत बड़ा गुनहगार है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में मां के पैर के तले जन्नत मानी गई है लेकिन आज कुछ औरतें गैरों के बहकावे में आकर इस्लाम को बदनाम कर रही हैं। मौलाना शहाबुद्दीन कादरी ने कहा कि जो इस्लाम को नहीं मानेगा वह मुसलमान नहीं है। हिंदुस्तानी कानून हिंदुस्तान चलाने के लिए अगर लागू कर दिया जाए तो वही काफी है।
बैठक में उलमा शरीयत के मुताबिक तलाक पर खुलकर बोले। बताया कि पति-पत्नी चाहें तो भी उन्हें शरीयत में एक साथ तीन तलाक की इजाजत नहीं है। इस तरह की सूरत में उन्हें पहले समाज और घरवालों के सामने एक तलाक देना होता है। इसके बाद उन्हें रिश्ते सुधारने के लिए शरीयत में मोहलत दी गई है। इसके बाद भी दोनों के रिश्ते सामान्य न हों तो फिर समाज के सामने दो तलाक। इसके बाद भी दोनों को संभलने का मौका मिलता है। फिर भी अगर दोनों को लगे कि अब जिंदगी साथ न कट पाएगी तो उन्हें शरीयत तीन तलाक लेने की इजाजत देती है। शौहर हो या बीबी दोनों को इसका हक है।
इस दौरान हाफिज हदीश, प्रिंसिपल मौलाना फखरुद्दीन, हाफिज अख्तर रजा, मौलाना रईश, मौलाना खुर्शीद, हाफिज अतहर हुसैन समेत नौजवान घोषी कमेटी के सदस्य इरफान अली, नियाष अहमद आदि मौजूद रहे।