सपा सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक साइकिल ट्रैक, जिले में सबसे फ्लाप योजना साबित हो रही। ट्रैक पर अभी तक साइकिल तो एक भी नहीं चली अलबत्ता फेरी वालों को ठिकाना जरूर मिल गया। कहीं बाटी चोखा की दुकान खुल गई तो कहीं हजाम ने अपनी दुकान जमा रखी है। थोड़ी दूर तक के लिए फेरी वालों से जो जगह बची ़भी तो वहां ट्रैक के बीचोबीच पेड़, बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर, टेलीफोन वायर और पानी की टोटियां लगी हुई हैं। ट्रैक पर इस तरह के इतने अवरोध हैं कि जानवर भी इस पर चलना मुनासिब नहीं समझते।
पिछले साल योजना के तहत पहले चरण में मोहद्दीपुर चौराहे से लेकर यूनिवर्सिटी चौराहे तक साइकिल ट्रैक बनकर तैयार हुआ। करीब सवा करोड़ रुपये खर्च कर जीडीए ने इसे बनवाया था। दूसरे चरण में गोरखपुर यूनिवर्सिटी से लेकर पैडलेगंज तक लोक निर्माण विभाग साइकिल ट्रैक बनवा रहा है। विभाग के मुताबिक 90 फीसदी काम खत्म हो गया है। दीपावली तक बाकी काम भी पूरा कर लिया जाएगा। सरकार की इस महत्वपूण़ॱर योजना पर अब तक करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च हो गए मगर शहर के किसी भी बाशिंदे ने इस पर किसी को साइकिल चलते नहीं देखी।
बोले साइकलिस्ट, ट्रैक मिले तब तो चले साइकिल
साइकिल चलाने के लिए जब अलग से ट्रैक बनना शुरू हुआ तो बहुत खुशी हुई थी। लगा कि थोड़ी दूर ही सही मगर गाड़ियों के रेलों के बीच साइकिल चलाने वाले भी सुरक्षित चल सकेंगे। मगर ट्रैक ऐसा बना कि आदमी तो दूर जानवरों के लिए भी चलना सुरक्षित नहीं। जगह-जगह पेड़, बिजली के खंभों और अतिक्रमण को देख ट्रैक पर साइकिल उतारने की कभी हिम्मत ही नहीं जुटा सके।
- सुरेंद्र प्रजापति
शहर में अभी भी बहुत से लोग खास कर गरीब तबके की सवारी तो अभी भी साइकिल ही है। सपा की यह योजना तो बहुत अच्छी थी मगर अफसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। अगर ऐसा नहीं होता तो साइकिल ट्रैक पर जगह-जगह लोगों का कब्जा नहीं हो जाता। ठीक है कि साइकिल ट्रैक के लिए पेड़ों को काटना ठीक नहीं मगर ट्रैक से बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर आदि तो हटाए जा सकते हैं।
- लवकुश