यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन अब विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्थित अपने केंद्रों को उनकी गतिविधियों के संचालन के लिए सीधे तौर पर ग्रांट नहीं मुहैया कराएगा। यूजीसी की ओर से व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब यूजीसी की ओर से पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिये ग्रांट यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के खाते में भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र के प्रस्ताव को यूजीसी से स्वीकृति मिलने के बाद रजिस्ट्रार रकम जारी करेंगे।
यूजीसी की ओर से सितंबर के अंतिम हफ्ते में गोरखपुर यूनिवर्सिटी स्थित यूजीसी ह्यूूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर को यूनिवर्सिटी के जरिये जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। अक्टूबर में गोरखपुर यूनिवर्सिटी की ओर से पीएफएमएस के लिए जरूरी सूचनाएं यूजीसी को भेज दी गईं। वेब आधारित ऑनलाइन फंड मैनेजमेंट एवं ई-पेमेंट आधारित इस व्यवस्था को लागू करने में करीब एक महीने समय लगा।
इसी फेर में इस बार गोरखपुर यूनिवर्सिटी स्थित यूजीसी के सेंटर के कर्मचारियों का वेतन भी लटक गया। सेंटर की डॉयरेक्टर प्रो. कीर्ति पांडेय ने बताया कि नई व्यवस्था के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं। दूरभाष पर यूजीसी के अधिकारियों ने इसी हफ्ते ग्रांट रजिस्ट्रार के खाते में भेजने की जानकारी दी है।
जल्द मिलेगा वेतन
यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों को जल्द ही वेतन मिल सकता है। ग्रांट के इंतजार में अवरुद्ध कर्मचारियों का वेतन उन्हें जल्द दिया जा सके, इसलिए 29 नवंबर को डॉयरेक्टर प्रो. कीर्ति पांडेय ने यूनिवर्सिटी से 42 लाख का लोन भी मांगा है। दूसरी ओर ग्रांट भी अब इसी हफ्ते में जारी होने की जानकारी उन्हें मिली है। उन्होंने बताया कि जल्द ही सभी कर्मचारियों का वेतन मिल जाएगा।