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छोटी- छोटी कोशिशें कर आप भी महफूज कर सकते हैं परिवार का भविष्य

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छोटी- छोटी कोशिशें कर आप भी महफूज कर सकते हैं परिवार का भविष्य
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गोरखपुर। 23 जुलाई को एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले गगहा, गजपुर के उदयभान चौधरी ने न कोई बीमा करा रखा था और न ही सामाजिक सुरक्षा के लिए ही कुछ कर सके थे। उन्होंने कुछ छोटी-छोटी बचत और कोशिशें की होती तो शायद आज उनक ा परिवार अपने भविष्य को लेकर इतना परेशान न होता। घर में चूल्हा जलने की चिंता होती, न बेटी मानवी को इलाज के अभाव में बिस्तर में सिसकना पड़ता। बड़ी बेटी और बेटों की पढ़ाई भी नहीं छूटती। यहां उदयभान एक व्यक्ति नहीं उस पूरे तबके के प्रतीक हैं, जिसे जिन्दगी चलाने के लिए हर क्षण संघर्ष करना पड़ता है। उदयभान प्रतीक हैं, उन लोगों के जिनके पास जिंदगी चलाने के संसाधन सीमित हैं। सरकार ने ऐसे लोगों के लिए ही सामाजिक सुरक्षा की कई योजनाएं संचालित कर रखी हैं। मगर, जानकारी नहीं होने की वजह से बड़ा तबका इसका लाभ नहीं उठा पा रहा। हम दुर्घटना में उदयभान की मौत और उसके बाद परिजनों की हालत के बहाने हर जरूरतमंद से अपील करते हैं कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी हासिल करें और समय रहते उनमें शामिल होने की प्रक्रिया पूरी करें। वरना...
काश! उदयभान ने जनधन खाता खुलवाया होता
-जीरो बैलेंस पर खाता खुलता
-रुपे कार्ड मिलता- दुर्घटना मेेें मौत पर परिजनों को मिलते-200000 रु.(45 दिन में एक बार कार्ड का इस्तेमाल जरूरी)
-रुपे कार्ड नहीं होने पर भी दुर्घटना बीमा के मिलते-30000
ली होती प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
बैंक खाते में हर साल कटवाने पड़ते मात्र-12 रु
पत्नी को मिलते -200000 रुपये
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना पालिसी ली होती तो...
सालाना प्रीमियम देना पड़ता-330 रुपये
अब पत्नी को मिलते -200000 रुपये
(केवल दुर्घटना ही नहीं, किसी भी तरह से हो मौत)
सामाजिक सुरक्षा की अन्य योजनाएं जो आपका और आपके बाद परिजनों का जीवन सुधार सकती हैं
प्रधानमंत्री अटल पेंशन योजना
ऐसे पेशों से जुड़े लोग जिन्हें पेंशन लाभ नहीं मिलता वे भी इस योजना में पेंशन के लिए आवेदन दे सकते हैं। 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच का कोई भी व्यक्ति इस योजना में शामिल हो सकता है। 1000, 2000, 3000, 4000 या अधिकतम 5000 रुपये प्रति माह पेंशन चाहने वालों के लिए उम्र के हिसाब से प्रतिमाह का प्रीमियम देना होगा।
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श्रम विभाग से भी दो से पांच लाख रुपये की मदद
उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के हित के लिए श्रम विभाग कई योजनाएं चलाता है। इसी के तहत मृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजना भी संचालित की जाती है। इसमें साल में 90 दिन काम करने वाले श्रमिकों के आंशिक तौर पर विकलांग होने पर एक लाख, स्थायी विकलांगता पर तीन लाख, दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख तथा सामान्य मृत्यु होने पर दो लाख रुपये मिलेंगे।
समाज कल्याण विभाग से भी मिलेगी मदद
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत भी अगर किसी गरीब की दुर्घटना में मृत्यु होती है तो उसे 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। इसके लिए मृत्यु होने के साल भर के भीतर विभाग में ऑनलाइन आवेदन करना होता है। शर्त यह है कि परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाला है। मसलन गांव में संबंधित परिवार की वार्षिक आय 46080 तथा शहर में 56460 रुपये ही होनी चाहिए। साथ ही जिसकी मृत्यु हुई उसकी उम्र 60 साल से कम हो।
राहत के ये रास्ते भी हैं
ध्यान रहे एटीएम कार्ड लेने के साथ शुरू हो जाती है बीमा पॉलिसी
बैंक में अकाउंट खुलने के बाद जैसे ही एटीएम कार्ड आपको मिलता है बीमा पॉलिसी लागू हो जाती है। बैंक की तरफ से बीमा करवाया जाता है जिससे एटीएम धारक की मौत होने के बाद परिवार को मदद मिल सके। इस स्कीम के मुताबिक आंशिक विकलांगता से लेकर मृत्यु होने तक अलग अलग तरह के मुआवजे का प्रावधान है। इसके लिए एटीएम धारक को कोई पैसा भी जमा नहीं कराना होता है। स्कीम के मुताबिक अगर किसी एटीएम धारक की दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसके परिवार के सदस्य को 2 महीने से लेकर 5 महीने के भीतर बैंक की उस ब्रांच में जाना होगा जहां उस शख्स का खाता था और वहां पर मुआवजे को लेकर एक आवेदनपत्र देना होगा। अगर आपके पास किसी एक बैंक में एक ही अकाउंट या फि र उस बैंक की दूसरी ब्रांच में भी अकाउंट हो तो भी मुआवजा आपको किसी एक एटीएम पर ही मिलेगा। मुआवजा देने के पहले बैंक ये देखेंगे कि मौत से पहले पिछले 45 दिन के भीतर उस एटीएम से किसी तरह का वित्तीय लेन-देन हुआ था या नहीं। मामूली-सी सालाना राशि के प्रिमियम पर बैंक 2000000 रु. तक का क्लेम देते हैं।
दुर्घटना हो तो परिजन क्लेम करें, मिल सकती है बड़ी मदद
आए दिन होने वाले सड़क दुर्घटना में अपनों को खो देने वाले पीड़ित परिवार हो या घायल होकर दिव्यांग हो जाने वाले व्यक्ति का इलाज और उसके आगे की जिंदगी बहुत कठिन हो जाती है। हादसे में जो खो गया उसकी भरपाई तो कभी नहीं हो सकती मगर पीड़ित व्यक्ति या परिवार के लिए प्रतिकर की धनराशि बड़ी सहारा बन सकती है। भारतीय न्याय व्यवस्था में ऐसे व्यक्ति या परिवार के लिए दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या उसके बीमा कंपनी को सरकार ने अधिनियम बनाकर उत्तरदायी बनाया है। सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के परिजन या घायल स्वयं प्रतिकर के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर सकता है।
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हिट एंड रन केस में मौत पर परिजनों को मिलते हैं, 50 हजार
क्लेम के जानकार अधिवक्ता उमेश मिश्र ने बताया कि दुर्घटना के बाद फ रार हो जाने वाले वाहनों के मामले में जिला मजिस्ट्रेट को यह पावर है कि वे मृत्यु की दशा में 50 हजार और घायल होने की दशा में 25 हजार रुपए तक प्रतिकर दे सकते हैं। इसके लिए वहां आवेदन दाखिल करना होता है।
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