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तीन तलाक पर कोई खुश तो कोई नाराज

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तीन तलाक पर कोई खुश तो कोई नाराज
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गोरखपुर। तीन तलाक पर कानून बनने पर ससुराल से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं ने खुशी जाहिर की है तो संभ्रांत और बुद्घिजीवी वर्ग की महिलाओं ने इसे गैरजरूरी करार दिया है। कुछ महिलाओं का कहना था कि कानून को और बेहतर बना कर पास किया जाना चाहिए था तो कुछ ने इसे शरीअत में दखल देकर मुस्लिम समाज का मनोबल गिराने वाला कानून बताया।
तीन तलाक की भुक्तभोगी हूं, पति ने घर से तो निकाला ही, दहेज में दिया गया सामान भी कबाड़ में तब्दील कर लौटाया, मेरी जिंदगी तबाह हो गई। तीन तलाक कानून बनने से अब इंसाफ मिलने की उम्मीद जागी है। अब किसी मर्द की हिम्मत नहीं होगी कि एक बार में तीन तलाक बोलकर किसी औरत की जिंदगी बरबाद करे। -सोनी खान, तीन तलाक पीड़िता
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इस्लाम में शरीअत जीवन यापन की बहुत ही प्रेक्टिकल गाइडलाइन है। यह सच है कि शरीअत का गलत इस्तेमाल भी होता है लेकिन इसके लिए कानून की नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने की जरूरत है। यह कानून माइनॉरिटीज को प्रताड़ित करने वाला है। यदि सरकार को मुस्लिम महिलाओं की इतनी ही चिंता है तो गोधरा दंगा पीड़ित जकिया जाफरी, इखलाक, पहलू की विधवाओं जैसों को इंसाफ दिलाने वाला कानून बनाना चाहिए था। - तलत अजीज, समाज सेविका
तीन तलाक कानून शरीअत में दखल है, यह कानून मुस्लिम महिलाओं के हक में नहीं बल्कि मुस्लिम समाज का मनोबल गिराने के लिए पास किया गया है। यह कानून राजनीतिक ज्यादा है इसका मुस्लिम समाज के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है। यदि तलाक पर कानून बनाया जाना था तो सभी केे लिए बनाया जाता। मुस्लिम महिला तो तलाक के बाद दूसरी शादी भी कर सकती है उन हिंदू बहनों का क्या जो बिना तलाक पति की प्रताड़ना का शिकार होती हैं। - फिरदौस खातून, सदस्य जमात इस्लामी हिंद, महिला विंग
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ट्रिपल तलाक कानून बनाने के पीछे सरकार जो भी मकसद हो, लेकिन इससे यह तो हुआ है कि मुस्लिम समाज अब शरीअत में तलाक के क्या प्रावधान हैं, इसको जानना चाहता है। जहां तक मैं जानती हूं कि एक साथ तीन तलाक के बारे में पवित्र कलामे पाक में कहीं जिक्र नहीं है। हुक्म है कि दो तलाक के बाद या तो भलाई के साथ रख लो या भलाई के साथ रुखसत कर दो। यदि मुस्लिम समाज अपने अंदर झांकता तो शायद दूसरे लोगों को हस्तक्षेप नहीं करना पड़ता। जो चीज शरीअत में है ही नहीं उसके खत्म होने से कम से कम मुझे तो कोई परेशानी नहीं है।
- प्रो. हुमा सब्जपोश, गोरखपुर विश्वविद्यालय
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