जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर झांड़-फूंक करता सोखा।
- फोटो : shivharsh
भले ही चिकित्सा विज्ञान आगे पहुंच चुका हूं, मगर अंधविश्वास अभी खत्म नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टर के इलाज के बाद भी एक महिला ने सोखा से झाड़-फूंक कराने में ही विश्वास किया। इमरजेंसी के बाहर बाकायदा आधे घंटे तक सोखा इस काम में लगा रहा और लोग तमाशा देखते रहे। बाद में इसकी भनक जब डॉक्टरों को लगी तो उन्होंने कर्मचारियों को भेजकर सोखा को हटवाया। अभी कुछ महीने पहले भी ऐसा ही वाकया सामने आया था।
खजनी थाना क्षेत्र के गोड़सहड़ा गांव के प्यारेलाल की पत्नी मनसा देवी को तीन दिन पहले बिच्छू ने डंक मार दिया था। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार करने के बाद घरवाले उन्हें लेकर शनिवार को जिला अस्पताल केकी इमरजेंसी में पहुंचे। डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें आराम करने की सलाह दी। इसी बीच आर्थो वार्ड में भर्ती गुड्डू का तीमारदार बेलीपार थाना क्षेत्र के एकदंगा गांव निवासी रामदयाल मिश्रा को लेकर पहुंचा। वह मनसा देवी के साथ आए अनिल साहनी के पास पहुंचा और झाड़-फूंक करा लेने की बात कहने लगा। अनिल ने उनसे सोखा का पता पूछा तो कुछ रकम लेकर वह खुद इस काम को करने को तैयार हो गया। फिर क्या था इमरजेंसी के बाहर ही तंत्रमंत्र की दुकान खुल गई।
मरीज के तीमारदार को कुछ सामान की लिस्ट पकड़ाई गई और थोड़ी ही देर में झाड़-फूंक शुरू हो गया। देखते ही देखते वहां पर भारी भीड़ एकत्र हो गई। खुद ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड भी इस तमाशा को रोकने की जगह देखता रहा। करीब आधे घंटे तक झाड़-फूंक चला। बाद में जब इसकी भनक अस्पताल प्रशासन को हुई तो उसे भगाया गया।