मेडिकल कॉलेज में एमआरआई तो हो रही है लेकिन उसकी प्लेट नहीं मिल पा रही है। इससे इंसेफेलाइटिस समेत कई बीमारियों का इलाज प्रभावित हो रहा है। उधर, रोजाना तीमारदार प्लेट की आस में एमआरआई सेंटर पहुंच रहे हैं। एक जुलाई से ही प्लेट खत्म होने से मरीजों की जांच की केवल रिपोर्ट ही दी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की सुविधा शुरू हुए अभी मुश्किल एक ही महीने हो सके हैं मगर दिक्कतें आने लगी है। ऑर्डर भेजे जाने के बावजूद कंपनी की लेटलतीफी की वजह से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब तो डॉक्टर भी सीटी स्कैन कराकर ही काम चला लेना चाह रहे हैं या फिर रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज कर रहे हैं। डॉक्टरों की माने तो कई ऐसे मामले होते हैं जिसमें जांच प्लेट के बिना बीमारी को ठीक से समझा नहीं जा सकता है। एक जुलाई को प्लेट खत्म होने की जानकारी अस्पताल प्रशासन को दे दी गई थी।
इस संबंध में एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि एमआरआई प्लेट के लिए ऑर्डर भेज दिया गया है। शीघ्र ही प्लेटें आ जाएंगी।
पांच दिन से दौड़ रहा
मेरे बेटा अमित वार्ड नंबर 12 में भर्ती है। उसे झटके आ रहे थे तो डॉक्टर ने एमआरआई लिखा। जांच भी हो गई मगर अभी तक प्लेट नहीं मिली। रोज ही डॉक्टर प्लेट के बारे में पूछते हैं और सेंटर पर जाने पर अगले दिन बुलाया जाता है।
- मुखलाल, गोला
कल आने को कहते हैं
बेटी गुड़िया का एमआरआई एक अगस्त हो ही हुआ है। अभी तक जांच प्लेट नहीं मिली। प्लेट मिले तो डॉक्टर को दिखाकर आगे दवा कराऊं। सेंटर पर जाने पर सिर्फ यही बताया जाता है कि कल आना। तीन दिन आकर लौट चुका हूं।
- रमेश वर्मा, कप्तानगंज