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फंसी जमीनों पर फैली खामोशी से कमिश्नर खफा

Thu, 05 Nov 2015 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने अपनी खाली और फंसी हुई जमीनों की रिपोर्ट कमिश्नर पी गुरुप्रसाद को सौंप दी है। छोटे-छोटेे विवादों या संवेदनहीनता की वजह से सालों से प्राधिकरण की कई एकड़ जमीन फंसी होने पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई है। उनका मानना है कि अगर जिम्मेदार सक्रिय होते तो यह नौबत न आती।
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बता दें कि वर्तमान में प्राधिकरण की करीब करीब छह सौ एकड़ जमीन विभिन्न विवादों में फंसी है। खोराबार की करीब 150 एकड़ जमीन पर प्राधिकरण पिछले एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी कब्जा नहीं ले पा रहा है। इस बीच तीन-चार बार प्रयास किए गए, मगर विरोध के चलते कभी अफसरों को खाली लौटना पड़ा तो कभी कार्रवाई के लिए फोर्स ही नहीं मिली। देखते ही देखते वहां की कई एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा हो गया। इसी तरह करीब 12 साल पहले शुरु हुई राप्तीनगर आवासीय योजना में तो 900 से अधिक लोगों को आवंटन मिला। करीब साढ़े तीन सौ लोगों ने रजिस्ट्री भी करा ली मगर जीडीए आज तक उन्हें कब्जा नहीं दिला सका। इसी तरह रामगढ़ताल परियोजना स्थित 150 एकड़ जमीन दो उद्योगपतियों के बीच फंसी है और मामला कोर्ट में चल रहा है। टीपी नगर में भी जीडीए की जमीन फंसी है तो कुछ ऐसी भी जमीनें है, जिन पर कब्जा हो गया और प्राधिकरण के जिम्मेदार जान ही नहीं पाए। कमिश्नर का कहना है कि उन्होंने पूरी रिपोर्ट देखी है। इनमें से कई ऐसी जमीनें हैं जिन्हें प्रयास कर विवादों से मुक्त कराया जा सकता है। उन्होंने ‘अमर उजाला’ को बताया कि प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के बिहार चुनाव से वापस आते ही यह कवायद शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जीडीए का लैंड बैंक काफी कम हो गया है। ऐसे में अगर इन जमीनों से जुड़े विवाद खत्म नहीं किए गए या कब्जा नहीं लिया गया तो नई योजनाएं लांच कर पाना मुश्किल होगा।
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