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आबादी बढ़ी- गाड़ियां भी, ‘कंट्रोल’ दस साल पुराना

Tue, 15 Mar 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रात में भी सड़कों पर जाम के कारण वाहन रेंग-रेंग कर चलते रहे। - फोटो : rajesh kumar
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दस साल में शहर की आबादी दो गुना बढ़ गई, जबकि गाड़ियों की संख्या में करीब चार गुना का इजाफा हो गया। इससे ट्रैफिक का दबाव भी काफी बढ़ गया, लेकिन इसे नियंत्रित करने के इंतजाम जस के तस रह गए। यही वजह है कि शहरवासियों को आए दिन कहीं न कहीं जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।
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ट्रैफिक पुलिस की संख्या कम होने से गोलघर, काली मंदिर, गणेश तिराहा, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर में ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए लेकिन यह प्रयोग भी सफल नहीं हुआ। ट्रैफिक नियंत्रित हो भी तो कैसे, एक तो विभाग के पास मानक के अनुरूप ट्रेंड सिपाही नहीं हैं और जिन दो सौ होमगार्डों की मदद ली जाती है उन्हें प्रशिक्षित ही नहीं किया गया।

वर्ष 2005 में ट्रैफिक विभाग में मानक के अनुसार एक ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, सात हेड कॉस्टेबल, 50 सिपाही की नियुक्ति हुई। इनके अलावा 40 से 50 होमगार्डों की सहयोग में ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन यातायात का दबाव बढ़ता गया और ट्रैफिक पुलिस की संख्या नहीं बढ़ाई गई। विभाग आज भी उसी मानक पर काम कर रहा है। 
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58 पुलिसकर्मी करते हैं 128 का काम
वर्तमान समय में ट्रैफिक पुलिस में एक सब इंस्पेक्टर, 21 दीवान, 36 सिपाही नियुक्त हैं। ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु करने के लिए दो ट्रैफिक इंस्पेक्टर, पांच सब इंस्पेक्टर, 12 दीवान और 51 सिपाहियों की जरूरत है। हालत यह है कि 58 पुलिसकर्मी 128 लोगों का काम करते हैं। सुबह दस बजे से लेकर रात आठ बजे तक ये पुलिसकर्मी जाम से निपटने के लिए जूझते रहते हैं। 

मनमानी के कारण भी लगता है जाम
जाम लगने का बड़ा कारण शहर के भीतर चलने वाले अवैध टैक्सी स्टैंड भी हैं। कचहरी, शास्त्री चौक, धर्मशाला, रेलवे स्टेशन, टीपी नगर चौराहा, पुलिस लाइंस, कॉर्मल स्कूल रोड पर चौराहे के पास ड्राइवर रोजाना गाड़ी खड़ी कर देते हैं। नियमानुसार चौराहे से 100 मीटर की परिधि में कोई गाड़ी खड़ी नहीं की जा सकती,  लेकिन ट्रैफिक पुलिस की ढील और ड्राइवराें की मनमानी से रोजाना चौराहे पर जाम लगता है। 

ट्रैफिक में नहीं आना चाहते हैं पुलिसकर्मी 
ट्रैफिक विभाग में कोई भी पुलिसकर्मी नहीं आना चाहता। दरोगा, हेड कॉस्टेबिल, सिपाही की कमी दूर करने के लिए आईजी के निर्देश पर जोन के 11 जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को स्वेच्छा से ट्रैफिक में आने के लिए आवेदन मांगा गया था, मगर गोरखपुर से मात्र दो सिपाही ही तैयार हुए। अन्य जिले से कोई आगे नहीं आया। 

यातायात निदेशालय में पत्र भेजकर फोर्स की कमी दूर करने का आग्रह किया है। वर्ष 2015 में भर्ती हुए रंगरूटों का प्रशिक्षण चल रहा है। इसके पूरा होने के बाद फोर्स मिलने की संभावना है। जिले में तैनात पुलिसकर्मियों से स्वेच्छा से आने के लिए आवेदन मांगे गए थे लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। 
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- डॉ. एसपी द्विवेदी, एसपी ट्रैफिक
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