कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत करने आये सिकंदर के वंशज
जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे यूनानी सम्राट सिकंदर के वंशजों ने मंगलवार को पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर समा बांध दिया। पारंपरिक गीत और नृत्यों पर झूमते आर्यन समुदाय के लोगों ने विद्यार्थियों को लेह लद्दाख की संस्कृति से रूबरू कराया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने तरह-तरह के प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। दाहहनु गांव से आए श्रृंग लमचु, ताशी पाल्दन, जलसन दोरजे, श्रृंग डब्लू, श्रृंग दोरजे, ताशी डोलकर, पदमा आग्मो, श्रृंग डोलकर ने बताया कि उनके गांव में आर्यों की मूल प्रजाति बसती है। आज भी आधुनिकता से दूर ये अपनी परंपरागत विशेषताओं के साथ रहते हैं। इनकी अपनी आर्य भाषा है और अपने रहन-सहन की शैली है। लेह से 200 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा पर सिंधु नदी के किनारे दाहहनु गांव स्थित है।
जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत करते यूनानी सम्राट सिकंदर