राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने के लिए तीन एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनेगा। इस पर तकरीबन 433 करोड़ रुपये की लागत आएगी। फिलहाल दो एसटीपी बनाने के लिए 360 करोड़ रुपये का डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) प्रदेश सरकार के माध्यम से नमामि गंगा योजना के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। 73 करोड़ रुपये की लागत वाले तीसरे एसटीपी को बाद में बनाने की योजना है।
नगर निगम क्षेेत्र के 230 नाले-नालियों का पानी रामगढ़ताल के साथ राप्ती नदी में गिरता है। रामगढ़ताल में गिरने वाले पानी को साफ करने के लिए बनाए गए दो एसटीपी ने काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन राप्ती नदी में सीवेज सीधा गिरता है। एनजीटी की सख्ती के बाद राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के पानी को शुद्ध करने के लिए तीन एसटीपी बनाए जाएंगे। जल निगम ने शहर के नाले नालियों के पानी के ट्रीटमेंट के लिए तीन एसटीपी का डीपीआर तैयार किया है। ये एसटीपी सुभाष चंद्र बोस नगर, महेवा और फर्टिलाइजर के पीछे बनाया जाएगा। इनके निर्माण पर 432.80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता डीपी मिश्रा ने बताया कि रेलवे लाइन के पार होने से तीसरे एसटीपी में थोड़ी तकनीकी दिक्कत है। जल्द ही इस समस्या को दूर कर लिया जाएगा। इसे फर्टिलाइजर फैक्टरी जोन का नाम दिया गया है। इसके लिए अलग एसटीपी का प्रावधान किया गया है। फर्टिलाइजर फैक्टरी के पीछे इसके लिए जमीन चिह्नित की गई है।
वहीं, नगर आयुक्त राजेश कुमार त्यागी का कहना है कि फिलहाल दो एसटीपी बनाने के लिए 359.80 करोड़ रुपये का डीपीआर प्रदेश शासन के माध्यम से नमामि गंगे योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार को भेजा गया है। दोनों एसटीपी से 81 एमएलडी (मिलियन लीटर/ दिन) सीवेज को साफ किया जाएगा। तीसरे एसटीपी की क्षमता 54 एमएलडी की होगी। इसके अंतर्गत सीवेज पंपिंग स्टेशनों के साथ साथ 1361 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का भी काम होगा।