इस कार्य को त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत कराया जाएगा।
विधायक ने बताया कि कलेक्ट्रेट के दोनों मुख्तारनामे और तीन वादकारी कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। जिला अधिवक्ता संघ के आग्रह पर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस कार्य को कराने की अपेक्षा की गई थी। बाद में इसे नियम-51 के तहत तथा नियम 301 के तहत सदन में उठाया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम से आगणन रिपोर्ट मांगी गई। इस कार्य को त्वरित आर्थिक विकास योजना से कराने का निर्णय लिया और नियोजन विभाग को वित्तीय व्यवस्था के लिए निर्देशित किया।
विधायक ने बताया कि शीघ्र ही नए अधिवक्ताओं को अप्रेंटिस भत्ता देने, अधिवक्ता कल्याण निधि की परिपक्वता राशि बढ़ाने तथा प्रदेश में स्वत: राजस्व न्यायालय की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।