इंसेफेलाइटिस मरीजों का हाल चाल लेतीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एईएस को नियंत्रित करने के लिए सुअर पालन को प्रतिबंधित करने पर जोर दिया है। वह रविवार को मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड का दौरा करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने बीमारी की महामारी को स्वीकार किया और केंद्र सरकार के प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सुअर पालन से ही यह बीमारी फैल रही है, क्योंकि यह जेई वायरस का वाहक है। इसलिए कोशिश की जा रही है कि पशुपालन विभाग सुअर की जगह लोगों को दूसरे जानवरों के पालन के लिए प्रेरित करे। उन्होंने बताया कि केजीएमयू और पीजीआई में एईएस विषाणु के पहचान पर काम चल रहा है और जल्द ही इसमें सफलता मिल जाएगी। दवा, इलाज के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रदेश सरकार को मदद दे रही है और देती रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को भी इस बीमारी से निपटने के लिए गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि जेई के खात्मे के लिए इसके टीके को राष्ट्रीय टीकाकरण के श्रेणी में शामिल कर टीका लगाया गया, जिसका असर भी हो रहा है। शुद्ध पेय जल का अभाव भी बीमारी का एक कारण है। केंद्र सरकार 11 राज्यों में समुदाय आधारित पेयजल के लिए 80 करोड़ रुपये दे चुकी है।
तीमारदारों का झेलना पड़ा विरोध
इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करने पहुंची मंत्री को तीमारदारों का विरोध भी झेलना पड़ा। कई तीमारदारों ने प्रदर्शन कर दवा न मिलने और इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत भी की। मगर मंत्री ने किसी की एक न सुनी और बिना सवालों का जवाब दिए ही गाड़ी में सवार हो निकल लीं।