बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बना नौसड़ बस स्टैंड।
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शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लक्ष्य से प्रशासन ने इलाहाबाद, वाराणसी और आजमगढ़ रूट की बसों को नौसड़ बस स्टैंड पर खड़ा रखने का फैसला तो ले लिया, मगर बिना तैयारी के एकाएक लिए गए फैसले से यात्रियों की सांसत बढ़ गई है। डिपो पर बुनियादी सुविधाओं के नाम पर महज एक टूटे फुटे शेड के अलावा कुछ भी नहीं है।
ऐसे मौसम में जब गर्मी धीरे-धीरे अपने भयावह रूप में आ रही है। यात्रियों को बस स्टैंड पर पीने का पानी, बिजली, शौचालय के साथ बैठने तक की व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। स्टेशन पर जब किसी बस का आगमन होता है तो स्टैंड पर मौजूद हर एक यात्री को धूल फांकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रह-रह कर चल रही हवा यात्रियों की दुश्वारियां और भी बढ़ा रही है।
बस स्टैंड पर मौजूद यात्री नरेंद्र तिवारी ने बताया कि स्टैंड पर व्यवस्था के नाम पर कुछ भी मौजूद नहीं है। रोडवेज का कोई जिम्मेदार तक स्टैंड पर मौजूद नहीं है। स्टैंड के सामने से ही डग्गामार वाहन यात्रियों को ले जा रहे है। एक अन्य यात्री पंकज श्रीवास्तव का कहना था कि स्टैंड पर पानी की व्यवस्था नहीं है। हाल ही में पानी की बोतल खरीद कर गला तर किया है। अब मजबूरी में दोबारा पानी खरीदने जा रहा हूूं। चंद्रशेखर ने बताया कि गाजीपुर के लिए दो घंटे से खड़ा होकर बस का इंतजार कर रहा हूं। कहीं बैठने की कोई अस्थाई व्यवस्था भी मौजूद नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों और महिलाओं को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं दिग्विजयनाथ यादव ने बताया कि स्टैंड पर शौचालय तक की कोई व्यवस्था नहीं है। गंदगी का अंबार लगा है, बस का इंतजार करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। आखिर सामान छोड़ कर कहां जाएं।
बस स्टैंड की मरम्मत के लिए शासन को 1 करोड़ 92 लाख रुपये का प्रस्ताव बना कर भेजा गया है। बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
आरएम एस के राय, गोरखपुर रीजन
गोरखपुर डिपो पर पानी सप्लाई ठप
गोरखपुर बस डिपो पर पानी की सप्लाई ठप होने से यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। दो दिन पहले मोटर के जल जाने से पैदा हुए संकट का समाधान अभी तक रोडवेज के जिम्मेदार नहीं निकाल सके हैं। उधर गर्मी में यात्रियों के साथ कर्मचारी भी परेशान हो रहे है। पूरे बस स्टैंड पर पानी के लिए महज एक ही वॉटर कूलर लगा है और उसके भी खराब होने से यात्रियों की दिक्कतें बढ़ गई है। एआरएम आरके मंडल ने बताया कि मोटर को बनवाने के लिए भेजा गया है। जल्द ही पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।