गीडा में भू-प्रयोग बदलने के तरीके में भी बदलाव कर दिया गया है। अब बिना गीडा बोर्ड की रजामंदी के जमीन का भू-प्रयोग नहीं बदला जा सकेगा। कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद के निर्देश के बाद अब बोर्ड ने भी इस फैसले पर अपनी सहमति दे दी है। मनमाने तरीके से कई भूखंडों का भू-प्रयोग बदले जाने का मामला पकड़ में आने के बाद यह सख्ती की गई है। अब ऐसे सभी भूखंड निरस्त करने की तैयारी की जा रही है जिनके भू-प्रयोग बदलने में नियमों की अनदेखी की गई हो।
लक्ष्मीकांत राय पुत्र दीनानाथ राय को गीडा के सेक्टर 22 में 24 मई 2012 को वाणिज्यिक भूखंड आवंटित किया गया था। तीन साल बाद इस भूखंड को परिवर्तित कर सेक्टर-9 में उन्हें जमीन आवंटित कर दी गई जो गीडा ग्रीन बेल्ट में आती है। यही नहीं, मामला पकड़ में न आए इसलिए मौके पर ग्रीन बेल्ट का वजूद मिटा दिया गया और वहां जितने भी पेड़ लगे थे, उन्हें खामोशी से काट दिया गया। इस तरह इस मामले में दो बार जमीन बदली गई जिससे गीडा को काफी वित्तीय क्षति हुई।
इसी तरह गीडा के सेक्टर 13 में पार्क के लिए आरक्षित जमीन श्रीप्रकाश मिश्र को आवंटित कर दी गई। ये दोनों आवंटन पूर्व सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के समय हुए हैं। ये तो सिर्फ बानगी है। बताया जा रहा है कि यह खेल पिछले कई सालों से जारी है। अगर गहनता से जांच हो जाए तो ऐसे कई मामले पकड़ में आएंगे।
गीडा में भू-प्रयोग बदलने के नियमों में ढिलाई का गलत फायदा उठाया जा रहा था। जिस जमीन का भू-प्रयोग बदलने पर शासन ने सख्ती कर रखी है उन्हें भी पूर्व में बदलकर जिम्मेदारों ने अपने चहेतों को आवंटित कर दी। अब जब तक बोर्ड को जरूरी नहीं लगेगा, तब तक भू-प्रयोग बदलने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।
- पी. गुरुप्रसाद, कमिश्नर