शीथ ब्लाइट बीमारी के प्रकोप से झुलसी धान की फसल।
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सूख रहे धान की फसल को किसान सूखा समझ रहे हैं, जबकि वह शीथब्लाइट नामक बीमारी है। यह दावा जिला कृषि विशेषज्ञ वीके चौधरी ने किया है। उनका कहना है कि दवा के छिड़काव से फसलों को बचाया जा सकता है।
जिले में एक लाख 53 हजार 355 हेक्टयेर में धान की फसलों की बुवाई किसानों ने की है। कुछ दिनों से धान की पत्तियां लाल होने लगी हैं। पत्तियों पर अंडाकार और बड़े धब्बे ऊपरी भाग में दिखाई देते हैं। कई दिनों के बाद पत्तियों के किनारे भूरे रंग हो जाते हैं और फसलें सूखने लगती हैं। आवश्यकतानुसार बारिश नहीं होने पर किसान इसे सूूखा समझ रहे हैं और धान की फसलों को बचाने के लिए खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। जबकि लक्षण शीथब्लाइट नामक बीमारी का है, इससे राहत पाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कापर ऑक्सीक्लोलाइड 500 ग्राम और स्ट्रप्टोसाइक्लीन 15 ग्राम प्रति हेक्टयेर की दर से छिड़काव का सुझाव दिया है।
जिला कृषि अधिकारी वीके चौधरी ने बताया कि किसान एक हजार मिली हैक्साकोनाजोल पांच प्रतिशत ईसी का भी छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबरों और व्हाट्सएप नंबरों पर भी समस्या लिख करके सुझाव हासिल कर सकते हैं। बताया कि खेतों में दवा का छिड़काव करते समय किसान मुंह को ढक कर रखे हैं और खाने-पीने की चीजों को हाथ न लगाएं।