तहसीलदार व नायब तहसीलदार अपनी मांगो को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देते।
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जिनके कंधों पर धरना खत्म कराने की जिम्मेदारी है, मंगलवार को वही धरने पर बैठे दिखे। वेतन विसंगति दूर करने और तनख्वाह बढ़ाने आदि मांगों को लेकर जिले की सभी तहसीलों के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने कलेक्ट्रेट में धरना दिया। मांगें पूरी न करने पर तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने तहसील दिवस का बहिष्कार कर विरोध जताया। उन्होंने प्रशासन के माध्यम से अध्यक्ष राजस्व परिषद को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी भेजा। चेतावनी दी कि अगर उनक ी मांगें नहीं पूरी की गईं तो वे राजस्व से जुड़े सभी कामों का बहिष्कार करेंगे।
उत्तर प्रदेश राजस्व (प्रशासनिक) संघ के बैनर तले धरने पर बैठे जिले के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का कहना था कि कई सालों से नायब तहसीलदार को ग्रेड पे 4200 से बढ़ाकर 4800 तथा 16 वर्ष की सेवा वाले तहसीलदारों को दूसरा एसीपी 6600 दिए जाने की मांग संवर्ग द्वारा की जा रही है मगर शासन कोई सुनवाई नहीं कर रहा। यही नहीं, गंभीर तो यह है कि विभिन्न विभागों के 25 ऐसे पद धरकों के वेतन बढ़ा दिए गए जिनके वेतन छठे वेतन आयोग लागू होने से पूर्व नायब तहसीलदार से कम थे। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं पूरी होने पर संघ ने चरणवार आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। इसी के तहत पहले चरण में पांच जुलाई से 15 जुलाई तक संवर्ग के सदस्यों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन हुआ। दूसरे चरण के ही तहत मंगलवार को कार्य बहिष्कार कर धरना दिया गया।