कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के चलते गोरखपुर समेत सूबे के 12 हजार कॉलेजों के विद्यार्थियों का वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति फंस गई हैं। 12वीं से ऊपर के 18 हजार कॉलेजों में से मात्र छह हजार कॉलेजों ने ही अपने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दिलाने में रुचि दिखाई।
इससे खफा शासन अब इन कॉलेजों को वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं देने का मन बना रहा है। शासन से जिले के अफसरों को मिले संकेत के मुताबिक, प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने आवेदन करने वाले कॉलेजों को ही वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का निर्णय किया है। हालांकि प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण ने आवेदन न करने वाले कॉलेजों को एक और मौका देने की बात कह रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, गोरखपुर में 90 फीसदी से अधिक कालेजों ने अभी तक ऑनलाइन आवेदन नहीं कराया है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी से कुछ ही विद्यार्थियों ने आवेदन किया। मगर एमएमएमयूटी की तरफ से वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए एक भी विद्यार्थी का आवेदन नहीं आया।
आवेदन के लिए कई बार अवधि बढ़ाने के बाद 10 दिसंबर अंतिम तिथि तय की गई थी। इसे लेकर 30 नवंबर को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में बैठक कर समाज कल्याण अधिकारी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक ने कॉलेजों के प्रबंधकों को जल्द से जल्द आवेदन कराने के लिए कहा गया था। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग ने कॉलेजों को कई बार पत्र भी भेजे। बावजूद इसके कुछ एक को छोड़ ज्यादातर कॉलेज प्रबंधन मौन साधे रहा।
जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में 10वीं से ऊपर के कॉलेजों ने अपने विद्यार्थियों का ऑनलाइन आवेदन नहीं कराया। इसे लेकर शासन सख्त है। पूरे प्रदेश में सिर्फ 6 हजार संस्थाओं की तरफ से ही आवेदन आए हैं। जिले में भी ऐसे कॉलेजों की संख्या 90 फीसदी के आस-पास है। कई बार इन्हें हिदायत दी गई मगर कोई सक्रिय नहीं हुआ।
- सुनील कुमार, समाज कल्याण अधिकारी
ऑनलाइन आवेदन के लिए चरणवार प्रक्रिया बनाई गई है। कहीं भी चूक हुई तो वजीफा या शुल्क प्रतिपूर्ति फंस सकती है। मगर इस बार तो कॉलेजों ने सर्वाधिक लापरवाही बरती। तय समय में कई कॉलेजों ने अपने विद्यार्थियों का आवेदन नहीं कराया। कई कॉलेजों ने तो पिछले बार वजीफा या शुल्क प्रतिपूर्ति न पाने वाले छात्रों का नवीनीकरण कराने के बजाए फिर से आवेदन करा दिया।
- डॉ केसी गोस्वामी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
कई बार चेतावनी दी गई, बावजूद इसके कई कालेजाें ने आवेदन नहीं कराया। शासन तक जानकारी पहुंच गई है। अब वहां से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एएन मौर्या, जिला विद्यालय निरीक्षक