फर्जी प्रमाणपत्रों पर दिलाई सहायक अध्यापक की नौकरी, सरगना सहित दो गिरफ्तार
गोरखपुर। फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने बृहस्पतिवार को देररात मुख्य सरगना अश्वनी कुमार श्रीवास्तव और मुक्तिनाथ को देवरिया से गिरफ्तार कर लिया। दोनों फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ देवरिया कोतवाली में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। एसटीएफ के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने कई शिक्षकों के नाम, पते और स्कूल के नाम बताए हैं जो कि फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र व दस्तावेज पर नौकरी कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र और दस्तावेज के सहारे सहायक अध्यापक पर भर्ती की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसका संज्ञान एसटीएफ के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने लिया। साथ ही पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ को फर्जीवाड़े के पर्दाफाश की जिम्मेदारी दी। पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ गोरखपुर के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह और कांस्टेबल आशुतोष कुमार तिवारी ने सूचनाएं जुटाईं। इससे पता चला कि फर्जीवाड़ा करके सहायक अध्यापक की नौकरी दिलाने वाला अश्वनी कुमार श्रीवास्तव पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरोधर कठौजिया विकासखंड भनवापुर सिद्धार्थनगर में शिक्षक है। अश्वनी की मार्कशीट व जून 2011 का सीटीईटी का प्रमाण पत्र भी फर्जी है। वह देवरिया के तुलसी बाड़ा थाना खुखुंदू का रहने वाला है। सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार राकेश सिंह ने भी अश्वनी का नाम लिया था। पुलिस को बताया था कि अश्वनी ही बीएड, टीईटी, सीटीईटी और बीएलई की फर्जी डिग्री बनाता, फिर नौकरी दिलाता था। इस मामले में सिद्धार्थनगर में ही मार्च 2019 में मुकदमा कराया गया था। इसी आधार पर एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने छानबीन शुरू की। एसटीएफ के मुताबिक अश्वनी का खास दोस्त मुक्तिनाथ बड़हलगंज गोरखपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पौहरिया राव में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहा है। बृहस्पतिवार को मुक्तिनाथ अपने दोस्त अश्वनी से मिलने देवरिया जाएगा। दोनों की मुलाकात मुक्तिनाथ के देवरिया स्थित घर पर होगी। इसके बाद ही घेराबंदी शुरू हो गई। एसटीएफ ने देवरिया पुलिस की मदद ली और छापा मारकर गिरोह के मुख्य सरगना अश्वनी व उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से खंड शिक्षाधिकारी गौरी बाजार देवरिया की फर्जी मोहर बरामद की गई है।
50 हजार में बनाते थे फर्जी डिग्री
एसटीएफ की पूछताछ में मास्टर माइंड अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने कई राज खोले हैं। एसटीएफ के मुताबिक एक फर्जी डिग्री 50 हजार रुपये में बनवाई जाती थी, फिर सरकारी अफसर या कर्मचारी मिलीभगत करके डिग्री सत्यापित कराई जाती थी। इस मामले की जांच अलग से कराई जा रही है। अश्वनी को मोनाड यूनिवर्सिटी की डिग्री विजय नामक व्यक्ति ने दी थी। इसी चैनल से ही कोलोरक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी, नार्थ ईस्ट यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा और जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी जोधपुर की डिग्री हासिल की जाती थी। कोरियर के जरिए डिग्री मंगाई जाती थी। कई बार ई-मेल से भी फर्जी डिग्री मंगाई गई है।
अपनी अलग पहचान बनाकर रह रहा था मुख्य सरगना
एसटीएफ के मुताबिक शिक्षक भर्ती में धांधली का मुख्य सरगना अश्वनी अपनी अलग-अलग पहचान बनाकर रहता था। उसके पास से दो पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। अश्वनी के पिता का असली नाम लक्ष्मीशंकर श्रीवास्तव है लेकिन मार्कशीट व कई दस्तावेज में पिता का नाम कुंवर बहादुर लाल लिखा है। पूछताछ में अश्वनी ने बताया कि खास दोस्त कस्तूरी पांडेय (2015 में निधन) ने कुंवर बहादुर लाल की मार्कशीट व दस्तावेज दिए थे। इसी आधार पर कंप्यूटर से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और पहचान बदलकर रहने लगे।
नौ सालों से काम कर रहा था गिरोह
फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र और दस्तावेज से सहायक अध्यापक की नौकरी दिलाने का खेल 2010 से चल रहा था। इसका पर्दाफाश भी एसटीएफ ने किया है। अश्वनी से पूछताछ के बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि राकेश सिंह के कहने पर डिग्री बना रहा था। अब तक कितने लोगों की डिग्री बना चुका, यह भी आरोपी को याद नहीं है। इस गिरोह ने बड़ी संख्या में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी दिलवाए हैं। अब एक-एक करके सबको धर दबोचा जाएगा।
बरामदगी
पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, फर्जी अंकपत्र व दस्तावेज, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ की मुहर, एक फर्जी मतदाता पहचान पत्र, दो निवास प्रमाण पत्र, तीन अंगूठे के नकली निशान, खंड शिक्षाधिकारी की एक मोहर, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, विभिन्न विश्वविद्यालय और टीईटी के अंक पत्र, दस्तावेज, प्रमाण पत्र और एक इंडिका कार।