गोरखपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर महीने भर से अधिक समय से चल रहीं अटकलों और दावों पर बृहस्पतिवार को विराम लग गया। सपा की गीतांजलि यादव ने भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव के भाई एवं निर्दल प्रत्याशी अजय बहादुर यादव को सात मतों से हराकर जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। गीतांजलि को 34 और अजय बहादुर को 27 वोट मिले।
73 सदस्यों में से 11 वोट अवैध हो गए, जबकि एक वोट नहीं पड़ा। अध्यक्ष पद के लिए गीतांजलि और अजय के अलावा निर्दल प्रत्याशी के तौर पर यशवंत यादव भी मैदान में थे, मगर उन्हें एक भी वोट नहीं मिला। उन्होंने खुद को भी अपना वोट नहीं दिया।
मतदान के अंतिम एक घंटे में वोट देने पहुंचे वार्ड नंबर दो से जीते सदस्य जितेंद्र सिंह को जहां वोट डालने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वहीं वार्ड नंबर 36 के पवन सिंह को वोट डालने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। जितेंद्र हत्या तो पवन हत्या के प्रयास के आरोपी हैं। पवन के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ था।
जैसे ही पुलिस उन्हें पकड़ कर कलेक्ट्रेट के भीतर ले जाने लगी, अचानक डिवाइडर से कूद कर सपाइयों ने उनकी पिटाई कर दी। पुलिस ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो सपा कार्यकर्ता उनसे भी हाथापाई करने लगे, जिससे कुछ पुलिस वालों को मामूली चोंटे आईं। एएसपी का बिल्ला टूट गया। सपाइयों को सूचना थी कि पवन अपना वोट अजय बहादुर को देने आए थे।
उधर, पवन के वोट नहीं देने पर अजय के भाई और भाजपा विधायक विजय बहादुर कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि सत्ता के प्रभाव में आकर पुलिस और प्रशासन ने पवन को वोट नहीं डालने दिया। हालांकि पुलिस के समझाने के बाद वह धरने से उठ गए मगर जैसे ही भाई के हारने की खबर लगी वह फिर टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए।
विधायक का आरोप है कि अवैध वोट और सहयोगी वोटर के नाम पर चुनाव में धांधली की गई है। वह इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे। विधायक ने पवन पर जानलेवा हमला करने को लेकर सपा उम्मीदवार व समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।