मेडिकल कालेज में हास्टल का शिलान्यास करते राज्य मंत्री चिकित्सा शिक्षा ,कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राधेश्याम सिंह ,प्रधानाचार्य डा.राजीव कुमार मिश्र व अन्य।
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सोमवार को मेडिकल कॉलेज के तीन हॉस्टल का सूबे के चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह ने शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज का सपा सरकार ने स्वरूप बदला है। वर्तमान में सरकार ने सिर्फ निर्माण के मद में 400 करोड़ रुपये अवमुक्त कर चुकी है। दवा, मरम्मत, नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है। मरीजों को हर सुविधा मिले इसके लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है।
उन्होंने बताया कि तीन हॉस्टल में सभी तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हाेंगी। वर्ष 2012 के पूर्व सूबे में सात राजकीय मेडिकल कॉलेज थे, अब इनकी संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इसके कारण सूबे के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें 1140 से बढ़ाकर 1840 कर दी गईं। सभी मेडिकल कॉलेजों को उपकरण मरम्मत के लिए पांच-पांच करोड़ दिए गए हैं। उन्होंने पीएम की सभा पर सवाल खड़ा किया। कहा कि 21 नवंबर को कुशीनगर में पीएम की रैली निराशाजनक रही। पीएम ने कोई भी घोषणा क्षेत्र के लिए नहीं किया। प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा व अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
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संविदा कर्मचारियों ने ज्ञापन दिया
गोरखपुर। 22 महीने के बकाए वेतन की मांग को लेकर संविदा कर्मचारियों ने राज्य मंत्री को ज्ञापन दिया। जल्द बकाया भुगतान और संविदा नवीनीकरण की मांग की। मंत्री ने सभी मांगों जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।
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नर्सों को बाहर करने का फैसला
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में सहयोग के लिए रखी गई बारह नर्स को बाहर करने का फैसला लिया गया है। कॉलेज प्रशासन की ओर से नर्सों को नोटिस भेजा गया है। इंसेफेलाइटिस वार्ड में चार साल पहले सहयोग के लिए 12 नर्सों को तैनात किया गया था। कॉलेज प्रशासन इन नर्सों को एनएचए मद से मानदेय दे रहा था, जिसपर एनएचएम ने आपत्ति भी जताई थी। आपत्ति के बाद इन्हें बाहर करने का फैसला लिया गया है।
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अब बायोमेट्रिक से उपस्थिति
गोरखपुर। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बायोमेट्रिक मशीन लगाने की शुरुआत हो चुकी है। डॉक्टर और कर्मचारियों के गैरहाजिर होने के चलते इसे लगाया गया है। जिले के दस से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र पर मशीनें लग चुकी हैं। सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि सहजनवां, चरगांवा समेत एक दर्जन अस्पतालों में बायोमेट्रिक मशीन लग चुकी है। जिन जगहों पर मशीन लग चुकी है वहां पर हाजिरी बायोमेट्रिक ही दर्ज हो रही है। बचे हुए अस्पतालों में अगले एक हफ्ते में मशीन लग जाएगी। तकनीकी कारणों से सिर्फ बरही और सिंघोरिया सीएचसी में यह मशीन तीन महीने बाद लगाई जाएगी।