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झंगहा में सांप काटने से पिता पुत्र की मौत

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झंगहा में सांप के डसने से पिता-पुत्र की मौत
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झंगहा (गोरखपुर)। झंगहा इलाके के मीठाबेल गांव में सांप के डसने से भूपेंद्र दुबे (35) और उनके पांच साल के बेटे पार्थ दुबे की मौत हो गई। मंगलवार की तड़के घटना होने के बाद चीख पुकार मच गई। आसपास के लोग भी एकत्र हो गए।
मीठाबेल के भूपेंद्र दुबे खेती किसानी करके जीवन यापन करते थे। भाई का गांव में ही प्राइवेट स्कूल भी है। भूपेंद्र पत्नी और बच्चे के साथ सोमवार की रात में सोए थे। पत्नी के मुताबिक तीन बजे सुबह अचानक बच्चा चीखने लगा। भूपेंद्र उठे और उन्होंने उसके पैर के पास सांप देखा। भूपेंद्र ने सांप को हाथ से हटाना चाहा तो सांप ने उन्हें भी काट लिया। दोनों को सांप काटता देख भूपेंद्र की पत्नी चीख पड़ी। शोर सुनकर आसपास के लोग भी आ गए और दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। मगर इलाज से पहले ही उनकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों के मृत घोषित करने पर शवों को गांव वापस लेकर आए और फिर झाड़ फूंक की भी कोशिश की। अंधविश्वास का खेल भी कई घंटे चला और फिर दाह संस्कार की तैयारी शुरू की गई।
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सांप काटे तो डरें नहीं, तत्काल इलाज कराएं
गोरखपुर। सांप का नाम आते ही डर से लोग कांप जाते हैं। यही डर ही लोगों की जान भी लेता है। सांप काटने से नहीं बल्कि डर से हार्ट अटैक होने से लोग जान गंवा देते हैं। जबकि सांप के काटने पर यदि थोड़ी सावधानी बरतकर तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया जाए तो जान बचाई जा सकती है। आमतौर पर घरों में निकलने वाले ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते हैं।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव बताते हैं कि अस्पताल तक आने वाले मरीजों को बचा लिया जाता है। लेकिन कई लोग झाड़ फूंक के चक्कर में पड़ जाते है और शरीर में जहर पूरी तरह से फैलने के बाद अस्पताल आते हैं। ज्यादातर मौत की वजह हार्ट अटैक ही सामने आती है। सांप के जहर से मरने वालों की संख्या बेहद कम होती है। डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि सांपों में जहर दो प्रकार के होते हैं, हेमोटॉक्सिन और न्यूरोटॉक्सिन। जिन सांप में हेमोटॉक्सिन जहर पाया जाता है, इनके काटने से उस अंग में सूजन हो जाती है। हेमोटॉक्सिन जहर ब्लड को पानी बना देता है। गेहुंअन व करैत में न्यूरोटॉक्सिन जहर पाया जाता है। न्यूरोटॉक्सिन जहर का मनुष्य के स्नायु तंत्र पर असर पड़ता है। दिमाग काम करना बंद कर देता है, मरीज बेहोश हो जाता है। फेफड़ा काम करना बंद कर देता है, जिससे मरीज की मृत्यु हो जाती है।
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