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झूठ की बुनियाद पर टिकी है चंदू बाबू व पुलिस की कहानी

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झूठ की बुनियाद पर टिकी है चंदू बाबू व पुलिस की कहानी
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गोरखपुर। गैलेंट इस्पात के प्रबंधक निदेशक (एमडी) चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू के आवास की बाउंड्री के पास अरविंद चौहान (16) पुत्र संतराज को गोली मारने के मामले में चाहे चंदू बाबू हों या पुलिस दोनों का रुख आरोपित के पक्ष में नजर आ रहा है। अमर उजाला संवाददाता ने मंगलवार को घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया। सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की और जो तथ्य सामने आए, उनके आधार पर इस निष्कर्ष पहुंचे कि पुलिस और चंदूबाबू यह साबित करने की कोशिश में हैं कि गार्ड ने सुरक्षा में गोली चलाई। वे इसे आत्मरक्षा का मामला बनाकर आरोपित को राहत पहुंचाना चाहते हैं। पुलिस की निष्क्त्रिस्यता का नतीजा है कि आरोपित सुरक्षा गार्ड संदीप पकड़ से अब तक बाहर है। भले ही किशोर का जीवन बचाने के लिए बेहतर से बेहतर इलाज के लिए चंदूबाबू ने कोई कसर नहीं छोड़ी है, मगर घटना की सच्चाई पर वे पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। घटना के बाद उनके हवाले से अमर उजाला भेजे लिखित पक्ष का लब्बोलुआब यह कि आराजक तत्वों की हरकत के विरोध में आत्मरक्षा में सुरक्षा गार्ड ने गोली चलाई। उनका यह बयान वैसा ही झूठ है, जैसे किशोर के पिता की तहरीर में लिखा गया कि ....‘चंदू बाबू ने सुरक्षा गार्ड संदीप को ललकार कर कहा कि क्या देखते हो...गोली मार दो। हम लोग देख लेंगे।’
एक सच यह भी है कि चंदू बाबू ने भले ही गोली चलाने को न कहा हो, मगर संदीप ने किशोर पर गोली उनके रसूख के ठसक में ही चलाई कि साहब सब संभाल ही लेंगे. अरविंद को गोली लगने के बाद उद्योगपति के हवाले से मीडिया को लिखित बयान जारी किया गया था। कहा गया था कि गैलेंट हाउस की दीवार काटकर व फांदकर कुछ लोग घुसे थे, जबकि मौके पर ऐसा कुछ नहीं है। दीवार के ऊपरी हिस्से से बिजली के तार दौड़ाए गए, जहां से कूदकर कोई अंदर नहीं जा सकता है। घटना स्थल की दीवार भी जस की तस है। दीवार काटने के साक्ष्य नहीं हैं। चंदू बाबू के आवास की बाउंड्री खत्म होते ही सामने उनकी खाली जमीन है, जिसमें कर्मचारियों के आवास भी बने हुए हैं। इसी जमीन का पिछला गेट लच्छीपुर में खुलता है। गेट से चंद कदम की दूरी पर स्थित खाली जमीन (रामलीला मैदान) है। इसी जमीन पर लच्छीपुर के कुछ किशोर क्रिकेट खेल रहे थे। क्रिकेट की गेंद उद्योगपति के अहाते में चली गई। गेट के पास ही दूसरे की बाउंड्री है और उसकी तीन फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर ही अरविंद चौहान अंदर झांक रहा था कि कोई नजर आ जाए और वह गेंद मांग सके, मगर सुरक्षा गार्ड ने उसे गोली मार दी ।
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ना गार्ड पकड़ सके और ना ही बता पाए असल वजह
घटना के बाद से ही पुलिस की नाकामी सामने आई है। पहले जहां पुलिस पर आरोपी गार्ड को भगाने का आरोप लगा, वहीं घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस ना तो गोली मारने के आरोपी गार्ड को ही पकड़ सकी है और ना ही घटना की असल वजह का ही पता लगा सकी। एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि सुरक्षा गार्ड को पकड़ने के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। गार्ड की गिरफ्तारी के बाद ही असल वजह सामने आएगी। यानी आरोपी के बताए बयान को ही पुलिस वजह मानेगी। हालांकि पुलिस बचाव में इतना जरूर बोल रही है कि प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद क्रिकेट की गेंद का ही है।
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गैलेंट के एमडी ने ये बोला था
गैलेंट इस्पात के प्रबंध निदेशक चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू ने कहा था कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। घायल युवक को अपनी एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज भेजा, फिर लखनऊ ले जाने की व्यवस्था की। लखनऊ में कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी लगे हैं। युवक का बेहतर से बेहतर इलाज कराया जाएगा। जो भी खर्च आएगा, उसका निर्वहन किया जाएगा। घटना के बाद से गार्ड फरार है, इसलिए पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। जो पता चला है, उसके मुताबिक बरगदवा के विकासनगर स्थित आवास ‘गैलेंट हाउस’ की दीवार काटकर व फांदकर कुछ लोग अवैध तरीके से घुस आए थे। उन्हें भगाने व बाहर करने के क्रम में गार्ड से संघर्ष भी हुआ। गार्ड ने हवाई फायरिंग की और दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से गोली एक व्यक्ति को लग गई।
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कोट::::
आरोपी सुरक्षा गार्ड की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। गार्ड के सामने आने के बाद ही असल वजह पता चलेगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक क्रिकेट का विवाद सामने आया है। गोली चलाना किसी भी दशा में सही नहीं है। नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तहरीर में उद्योगपति का जिक्र सही नहीं था, इस वजह से केस में उनका दर्ज नहीं किया गया है।
डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, एसएसपी
पुलिस का झूठ और मौके की सचाई
उद्योगपति के रसूख को सलाम करते हुए एक पुलिस अफसर ने मंगलवार को अमर उजाला संवाददाता को फोन करके पूरे घटनाक्रम को ही गलत ठहरा दिया। उनके मुताबिक क्रि केट खेलने और गेद चंदूबाबू के अहाते में जाने की बात ही बेबुनियाद है। उन्होंने अपने बात की समर्थन में कुछ तथ्य बताए और कहा कि मौके पर जाकर इसकी पुष्टि कर लें। अमर उजाला संवाददाता ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो साफ पता चल गया कि वे वे चंदूबाबू की जुबान में बोल रहे थे। चूंकि अधिकारी ने सारी बात ऑफ द रिकॉर्ड बताई, लिहाजा उनके नाम का उल्लेख नहीं किया जा रहा है। मगर इस घटनाक्रम का उल्लेख इसलिए कर रहे हैं कि इस मामले में लोगों को पुलिस की मानसिकता का तो पता चले।
अधिकारी- मैदान छोटा है, गीली मिट्टी पर कोई पैर के निशान नहीं मिले
हकीकत : मैदान खेलने के लिए पर्याप्त है, मिट्टी नहीं बल्कि कंक्रीट है।
अधिकारी-वहां पर क्रिकेट मैच नहीं होता है
हकीकत : वहां पर रोजाना ही बच्चे क्रिकेट खेलते हैं, आसपास के लोगों ने भी पुष्टि की
अधिकारी- दीवार तोड़कर कई बार चोरी हुई है
हकीकत : मौके पर कोई भी दीवार टूटी नहीं मिली है जिससे यह तय हो सके की अंदर कोई गया था
अधिकारी-सीसी कैमरा भी सुरक्षित नहीं रह सकता है
हकीकत : बाउंड्रीवाल के ऊपर से बिजली के तार गए है, यह संभव नहीं है
भइया झांक रहे थे और गार्ड ने मार दी थी गोली
गार्ड के गोली मारने से अरविंद अस्पताल में है तो आसपास के बच्चे खौफजदा। घटनास्थल पर खड़े होते ही कुछ बच्चे आ जाते हैं। उनसे पूछा कि सोमवार को क्या हुआ था तो सभी एक सा ही जवाब देते हैं। बताते हैं कि मैदान में खेलने के दौरान ही गेंद गेट के अंदर चली गई थी। दीवार पर खड़े होकर अरविंद अंदर झांक रहे थे ताकि कोई आए और गेंद मांग ले। यह सब होता, इससे पहले ही सुरक्षा गार्ड ने गोली मार दी।
सत्यम चौहान, शिवा, सुनील, रूपाली या फिर किशोर अनुराग, सुमित, सूरज ने कहा कि यदि घटना कुछ और होती तो सबके जवाब एक जैसे नहीं हो सकते थे। इतना तय है कि क्रिकेट की गेंद उद्योगपति के परिसर में गई थी। इसके कई प्रत्यक्षदर्शी हैं, जो किसी भी फोरम पर अपनी बात कह सकते हैं। घटनास्थल पर सभी क्रिकेट ही खेल रहे थे और एक साथ मौजूद होने की वजह से घटना जहन में घर कर गई है। क्रिकेट खेलने के दौरान ही विवाद हुआ था। बच्चों ने बताया कि भइया दीवार पर खड़े थे और अंदर से गोली मार दी गई। वहीं अनुराग ने बताया कि दो गेंद गायब हो चुकी थी। तीसरी खरीदकर लाए थे और फिर वह भी गेट के अंदर चली गई थी जिस वजह से दीवार पर खड़े होकर मांगने की कोशिश कर रहे थे।
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ये था मामला
चिलुआताल इलाके में गैलेंट इस्पात के मालिक के सुरक्षा गार्ड संदीप कुमार सिंह ने अरविंद चौहान को गोली मार दी थी। अरविंद गेट के अंदर गई गेंद को लेने के लिए दीवार पर खड़ा होकर अंदर झांक रहा था। गोली सीधे अरविंद चौहान के सिर में लगी और वह बाउंड्रीवाल के नीचे गिर पड़ा। यह देख आसपास के लोग भागकर गए तो देखा कि गोली का छर्रा अरविंद की एक आंख में धंसा है। आंख पूरी तरह से खराब हो गई। चेहरे और शरीर के अन्य हिस्से पर गोली के छर्रे लगे है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उद्योगपति का आवास घेर लिया था। घायल का लखनऊ के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा। मंगलवार को उसे केजीएमयू लखनऊ से लखनऊ के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया।
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